Shri Ashok Gehlot

Former Chief Minister of Rajasthan, MLA from Sardarpura

नई दिल्ली स्थित जवाहर भवन में RGSC एवं RGF द्वारा आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन "हरा भरा स्वराज: Rise & Act" में सम्मिलित होकर विचार साझा किए।

दिनांक
20/08/2026
स्थान
नई दिल्ली


कांग्रेस ने हमेशा पर्यावरण संरक्षण को राष्ट्र निर्माण का अभिन्न हिस्सा माना है। श्रीमती इंदिरा गांधी ने 1972 के स्टॉकहोम सम्मेलन से लेकर 'प्रोजेक्ट टाइगर' और संविधान में 48A व 51A(g) जोड़कर प्रकृति की रक्षा को संवैधानिक दायित्व बनाया। वहीं, श्री राजीव गांधी ने विकास और पर्यावरण में संतुलन साधते हुए पर्यावरण मंत्रालय का गठन, गंगा एक्शन प्लान और ऐतिहासिक 'पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986' जैसे युगांतरकारी कदम उठाए।

अब नेता प्रतिपक्ष श्री राहुल गांधी अंडमान के संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने के लिए ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट के विरुद्ध पुरजोर आवाज़ उठा रहे हैं।

पर्यावरण संकट और जलवायु परिवर्तन को लेकर नई पीढ़ी को भी काम करना चाहिए। समय की मांग है कि युवा शक्ति आगे आए, सरकारों की जवाबदेही तय करे और 'Rise & Act' के संकल्प के साथ हरा-भरा स्वराज गढ़े।

नई दिल्ली स्थित जवाहर भवन में RGSC एवं RGF द्वारा आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन "हरा भरा स्वराज: Rise & Act" में संबोधन:

मुझे खुशी है कि अधिकांश जो है पूरे देश भर से आप लोग आए हैं और यह अपने आप में बड़ी उपलब्धि है राजीव गांधी फाउंडेशन की भी और RGSC की भी कि करीब 524 रजिस्ट्रेशन हुए हैं , उसमें 107 बच्चों ने केस स्टडी की है और 76 यूनिवर्सिटी के छात्रों ने पार्टिसिपेट किया जो करीब 21 राज्यों से हैं। तो आप सबको बहुत-बहुत मुबारकबाद।

राजीव जी नौजवान थे, 40 साल की उम्र में प्राइम मिनिस्टर बन गए। मुझे सौभाग्य मिला उनके साथ में राज्य मंत्री रहने का, मेरे सीनियर मिनिस्टर प्राइम मिनिस्टर खुद थे। तो मैंने बहुत करीब से उनको देखा है, जो उनकी संवेदनशीलता थी, जो उनकी दूरदृष्टि थी, नौजवानों के प्रति जो प्रतिबद्धता थी उनकी, सत्ता के विकेंद्रीकरण की बात थी, पर्यावरण को लेकर जो उनकी सोच थी, वो इतिहास बन चुका है। नौजवानों को जो आज Gen Z कहलाती है, 40 साल पहले वो सपना देख लिया राजीव जी ने।

40 साल पहले उन्होंने 18 साल के छात्र को, नौजवान को उन्होंने पहली बार वोट का अधिकार पहली बार दिया। मैं खुद उस वक्त वर्किंग कमेटी में था। कितने सारे लोगों ने विरोध किया। तब भी राजीव जी का कमिटमेंट था, सोच थी कि भागीदारी जो है नौजवानों की होनी चाहिए। फिर पंचायतों के अंदर, नगर निकायों में महिलाओं को आरक्षण दिया। इस प्रकार से उनकी सोच उस वक्त से यह थी और मैं समझता हूं कि एक इतिहास बन गया देश के अंदर। उन्हीं की सोच के आधार पर 21st सेंचुरी की बात की थी, लोगों ने मजाक उड़ाया था।

वाजपेयी जी तो बैलगाड़ी लेकर आए थे पार्लियामेंट के अंदर कि सब लोग बेरोज़गार हो जाएंगे अगर कंप्यूटर आ जाएगा । अब देखिए किसी का काम चलता है बगैर कंप्यूटर बगैर इंटरनेट? अब तो AI आ गया है। मैं खुद बहुत उपयोग करता हूं AI का। आप सोच सकते हो कि यह राजीव गांधी जी की सोच थी जो आज 21st सेंचुरी हम देख रहे हैं, उनकी सोच का परिणाम था और मुझे कहते हुए गर्व है कि जो सब्जेक्ट रखा गया हरा भरा स्वराज, राइज एंड एक्ट।

मुझे याद आता है इंदिरा जी का, वो दुनिया के अंदर पहली राष्ट्र अध्यक्ष थी जिन्होंने 1972 में पहली बार दुनिया के मुल्कों का ध्यान आकर्षित किया स्टॉकहोम जाकर के और दुनिया के मुल्क के राष्ट्रपति आए ही नहीं थे कि वहां पर्यावरण की स्थिति की क्या बात करेंगे हम लोग वहां, विषय वो रखा हुआ था। पहली बार दुनिया का ध्यान आकर्षित किया इंदिरा जी ने कि आने वाले वक्त के अंदर यह क्लाइमेट चेंज , ग्लोबल वार्मिंग, प्रदूषण की जो स्थिति बनेगी, वो दुनिया के लिए चुनौती बनेगी। आज देख लीजिए आप।

इस बार मानसून ऐसा आया है कि अधिकांश जगहों पर सूखा पड़ रहा है। लन्दन में पंखे और एसी होते ही नहीं थे। इस बार लाइन लग रही है एसी, पंखे खरीदने के लिए। यूरोप में नदियां सूख रही हैं तो दुनिया भर के अंदर चैलेंज हो गया है। यह चुनौती इंदिरा जी ने उस वक्त में विश्व के सामने रखी था। लंबा इतिहास है। अगर जाएंगे तो बहुत वक्त लग जाएगा। हम राहुल जी को सुनना चाहेंगे।

1992 में रियो में अर्थ समिट हुआ, उससे पहले 89 में राजीव जी खुद गए थे यूगोस्लाविया के अंदर और वहां किस प्रकार से उन्होंने प्लेनेट प्रोटेक्शन फंड का सपना देख लिया 40 साल पहले। ऐसा फंड बने यूएन के अंदर। 0.1% जीडीपी का अगर रखेंगे तब भी 18 मिलियन अमेरिकन डॉलर इकट्ठा होगा, जो टेक्नोलॉजी है एन्वॉयरन्मेंट की उसके ऊपर खर्च होगा।
तो कहने का मतलब यह है लंबा इतिहास बनाया है तो कांग्रेस सरकारों ने बनाया है। एक के बाद एक कई एक्ट बनाए, पास किए। चाहे वो गंगा की सफाई का हो, यह भी राजीव जी के वक्त की बात है। एन्वॉयरन्मेंट प्रोटेक्शन एक्ट बना दिया। बिना प्रायर अप्रूवल के कोई भी बड़ा प्रोजेक्ट नहीं आ पाएगा, पहले असेसमेंट होगा, एन्वॉयरन्मेंट इम्पैक्ट कितना पड़ेगा उसका अससेमेंट होगा, उसके बाद में परमिशन देंगे। इतना बड़ा शानदार वो कानून है कि आज भी सुप्रीम कोर्ट उसको आधार बना के फैसला करता है । तो कहने का मतलब यह है कि अनेकों काम किए। वॉटर पालिसी बना दिया उन्होंने। कोई कमी रखी नहीं देश के अंदर और उसी से हम आगे बढ़ रहे हैं।

इसलिए इस मौके पर कहना चाहूंगा राहुल जी को कि राजीव गांधी स्टडी सर्किल सोनिया जी की प्रेरणा से बनाया था। करीब करीब सभी राज्यों में इसकी इकाईयां बन गई गोवा को छोड़ कर के और राजीव गांधी फाउंडेशन, दोनों मिलकर के लगातार कोई न कोई प्रोग्राम करते रहते हैं यहां पर। और मुझे खुशी है कि दिल्ली के अंदर या देश के अंदर भी एक मैसेज गया है कि कंस्ट्रक्टिव काम करने में एक नया प्लेटफार्म उपलब्ध हुआ है।

जल जंगल जमीन की बात करें तो सोनिया जी और डॉ मनमोहन सिंह जी के वक्त में पहली बार फॉरेस्ट प्रोटेक्शन एक्ट बन गया जो कि क्रांतिकारी काम है। ये सब बातें आपको मालूम है। इसलिए मैं कहना चाहूंगा कि जो गारंटी मिली है वन अधिकार की आदिवासियों को, वह भी अपने आप एक बहुत बड़ी उपलब्धि मानता हूं मैं।

इसलिए लंबी बात नहीं कहता हुआ, राहुल गांधी जी अभी ग्रेट निकोबार गए थे, अंडमान निकोबार, वहां पर जो धज्जियां उड़ाई सरकार की, किस प्रकार बर्बाद कर रहे हो आइलैंड को, और यह जो 86 में राजीव जी ने आईलेंड डेवलपमेंट ऑथोरिटी बनाई थी , उस जमाने के अंदर आईलेंड अथॉरिटी बनाना, इतना दूरदृष्टि का सपना देखना, यह अपने आप में मैं समझता हूं, आप सोच सकते हो किस प्रकार के व्यक्तित्व वो थे जो दुर्भाग्य से हमारे बीच नहीं रहे। इंदिरा जी की तरह वह भी शहीद हो गए देश के लिए और देश को दिशा दे दी है इस बात का हमें गर्व होना चाहिए आज उनके जन्म दिवस के अवसर पर।

अरावली का मामला याद है, जैसे ही हमने डीपी चेंज की, लोगों ने जन आंदोलन शुरू कर दिया पूरे देशभर के अंदर और आखिर में सरकार को मैनेज करना पड़ा सुप्रीम कोर्ट को, कहना पड़ा, रेस्क्यू में आई सुप्रीम कोर्ट और स्टे कर दिया गया और शांति हो गई अरावली को लेकर सौ मीटर की जो बात थी उसमें। ये तमाम बातें आपको मालूम हैं। इसलिए मैं यही बात कहता हुआ अपनी बात समाप्त करता हूं और पहले महाजन साहब अपनी बात कहेंगे, उसके बाद राहुल जी बोलेंगे।

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