मीडिया से बातचीत :
दिनांक
18/08/2026 |
स्थान
जयपुर
|
प्रदेश के विद्यालयों में बिना अनुमति फोटो , वीडियो इत्यादि न बनाए जाने संबंधी आदेश पर प्रतिक्रिया:
अभी तो ऐसी स्थिति बनी है प्राइमरी स्कूल में क्या हो रहा है? एक तरफ तो जेन - ज़ी जंतर मंतर बैठे और राहुल गांधी जी ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना दे दिया। इशू बनाया, पूरे देश में कांग्रेस कमेटियों ने धरने दिए थे। शिक्षा का जो सेक्टर है, इसमें आमूलचूल परिवर्तन हो, जिससे पेपर लीक भी नहीं हो, शिक्षा का जो अप्रोच है वो बिल्कुल नई आए जिससे कि देश दुनिया के अंदर मैसेज जाए कि हिंदुस्तान के अंदर शिक्षा के क्षेत्र को तवज्जो दी जा रही है।
शिक्षा, स्वास्थ्य दो ही बातें होती हैं।आम आदमी चाहता है कि स्वास्थ्य अच्छा बना रहे, उसके लिए सुविधा मिले और बच्चों की पढ़ाई अच्छी हो। राजीव गांधी जी के वक्त में मानव संसाधन मंत्रालय बनाया गया था और मिस्टर पी वी नरसिम्हा राव जी जो बाद में प्रधानमंत्री बने, उनको बनाया गया इस मंत्रालय का मंत्री। आप कल्पना कर सकते हो कि कहाँ तो नरसिम्हा राव जी मंत्री बने और कहाँ यह धर्मेंद्र प्रधान जी मंत्री बने शिक्षा मंत्रालय के जिसका नाम बदल दिया।
पूरे देश में अभी यही बहस चल रही है। उस बहस के चलते -चलते स्टेट गवर्नमेंट ने बीच में यह आदेश जारी कर दिया। तो क्या मुख्यमंत्री जी से डिस्कस करते हैं कि नहीं करते मंत्री लोग? क्या मंत्रिमंडल की पूरी सलाह थी इस आदेश के अंदर? क्या मंत्रिमंडल ने मिलकर यह फैसला किया क्या? यह हम जानना चाहते हैं। इतना बड़ा फैसला ? आपने मीडिया को रोक दिया अंदर जाने से। दूसरा कोई अंदर जा नहीं सकता। अरे पचास काम पड़ते हैं स्कूल के अंदर। आपने कह दिया कि अंदर एंटर नहीं कर सकते, परमिशन लो उसके लिए। मजाक बना रखी है इन्होंने, सरकार की मजाक बना रखी है, डिपार्टमेंट की तो मजाक बनी हुई है पहले से ही। इसलिए यह आदेश वापस लेना चाहिए ये मेरा मानना है।
निकाय चुनावों की तैयारी को लेकर पूछे प्रश्न का जवाब :
प्रदेश के अंदर पूरा माहौल अच्छा है। टिकट वितरण की पूरी प्रक्रिया के लिए अभी बातचीत की गई और सब मिलकर इलेक्शन लड़ेंगे और मैं सब से अपील भी करना चाहूंगा कि तमाम हमारे जो MLA's, MP's हैं, तमाम हमारे जिला कांग्रेस कमेटी, ब्लॉक कांग्रेस कमेटी, मंडल कांग्रेस कमेटी और पंचायतों के भी जो अध्यक्ष बनाए जा रहे हैं, उन सबको और आम कार्यकर्ताओं को भी कि यह चुनाव बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इस सरकार के ढाई साल में देखा हमने जो पट्टे हम पाँच सौ में दे रहे थे, बारह लाख पट्टे हमने बांट दिए, इस सरकार के वक्त में बार बार अभियान चलाते हैं। अभियान फेल हो रहा है। कोई विकास हो ही नहीं रहा है शहरों के अंदर। नरेगा की तरह हमारी जो योजना थी शहरी रोजगार योजना वो इतना क्रांतिकारी फैसला था, देश के अंदर मेरे ख्याल से आंध्र प्रदेश के बाद में राजस्थान था जिसने यह योजना शुरू करी जिसमें नरेगा के पैटर्न पर शहरों में रोजगार मिले, उसको बंद कर दिया है। तो कई योजनाएं जिनमें राष्ट्रीय - अंतरराष्ट्रीय लोन आता है वो योजनाएं बंद पड़ी है। अभी ये हमारा आईपीडी टावर बन रहा है, यह भी हमने जो स्मार्ट सिटी की स्कीम थी उसको बनाया साथ में लिया, तो बड़े बड़े काम हमने किए हमारे वक्त में। मिस्टर शांति धारीवाल के वक्त में ऐतिहासिक काम हुए हैं यूडीएच- एलसीजी , स्वायत्तशासी संस्थाओं को लेकर और यह बर्बाद कर दिया पूरा इन्होंने, इस मंत्रालय पर ध्यान दे नहीं रहे हैं। ये मंत्रालय बहुत इम्पोर्टेन्ट है शहरों के लिए। शहरों में विस्तार के काम आ गए, जेडीए के अंडर आ गए, जो डेवलपमेंट अथॉरिटी बनी हैं उसमें आ गए हैं, उन गाँवों की तरफ कोई ध्यान दे नहीं रहा है ।
यह डिपार्टमेंट, यह मंत्रालय बहुत इम्पोर्टेन्ट है। उसी के चुनाव हो रहे हैं और सरकार को लेकर लोगों में बहुत गुस्सा है । मैं उम्मीद करता हूं कि कांग्रेस भारी बहुमत से जीतेगी। टिकट का वितरण ढंग से हो जाए, उसके लिए बातचीत हुई है। उम्मीद करते हैं जो जाएंगे ऑब्ज़र्वर उनको ही पीसीसी पूरा अधिकार देकर भेजेगी। आप फैसला वहां की स्थिति, वहां के मेरिट पर करो।
एक भी टिकट सिफारिश पर मत दो। सिफारिश टिकट दिया नहीं वो हारा नहीं, जो जेन्युइन कार्यकर्ता है उसको टिकट मिले बस। चाहे मैं भी सिफारिश करूं, मेरे पास जयपुर कोई आदमी आ गए, मैं किसी के लिए सिफारिश करूंगा। बीकानेर में करूं, भरतपुर में करूं तो मुझे क्या पता वहां स्थिति क्या है। मैं सिफारिश करूंगा, भाई पूर्व मुख्यमंत्री कह रहे हैं, दे दो टिकट इसको। कैसे जीतेगा वो? जीतेगा तभी जब जमीनी हकीकत क्या है, उसके आधार पर टिकट बंटेंगे तो जीतेंगे। बस ये मेरा मानना है।
पत्रकार: साठ फ़ीसदी युवाओं को टिकट देने पर चर्चा चल रही है ?
जवाब : वो मैंने कहा पचास परसेंट से ज्यादा टिकट जेन -जी को, युवाओं को दें। क्योंकि जेन -जी आने के बाद में एक पूरा देश के अंदर जमाना बदल रहा है, नई पीढ़ी आगे आ रही है। सीनियर का अनुभव काम लो, उनको भी साथ रखो। पर जो जेन -जी कहला दीजिए युवा पीढ़ी कहला दीजिए, इसका जो महत्व है, उससे कोई इनकार कर नहीं सकता।
जंतर मंतर पर जो एक आंदोलन किया इन्होंने, और राहुल गांधी जी ने जो धरने दिए पीएम हाउस के बाहर, फिर कांग्रेस कमेटी ने सब जगह धरने दिए, प्रदर्शन किए। मैंने भी भाग लिया दो बार यहां पर जयपुर की सड़कों पर। उसके बाद में एक माहौल बन चुका है कि बदलाव पीढ़ी का हो रहा है, हमें उस भावना को पहचानना चाहिए। युवाओं को जहां मौका मिले, उनको भी काम करना पड़ेगा, उनको भी समर्पित होना पड़ेगा, प्रतिबद्ध होना पड़ेगा पार्टियों के साथ में और जो हमारी नीतियां कांग्रेस की है, कार्यक्रम है, सिद्धांत है, गांधी जी के वक्त के हैं और डॉ. अम्बेडकर के संविधान के अंतर्गत हैं और पंडित नेहरू, मौलाना आजाद, सरदार पटेल ,बड़े - बड़े नेताओं का योगदान है, सब जानते हैं। लंबी कहानी है हमारे इतिहास की।
कांग्रेस को 90 साल हो गए वन्दे मातरम् गाते हुए ; भाजपा गिल्टी कॉन्शियस है :
अभी वन्दे मातरम् को लेकर हल्ला कर रहे हैं, इनको पूछो आपको वन्दे मातरम् से क्या मतलब है? आपने तो पचास साल तक तिरंगा झंडा नहीं फहराया अपने हेडक्वार्टर पर नागपुर के अंदर आरएसएस में, जब वंदे मातरम् गाती थी। कांग्रेस को 90 साल हो गए वन्दे मातरम् गाते हुए। आप बताइए कांग्रेस को 90 साल हो गए गाते हुए और उस गायन के अंदर जो है अभी एक बिल लेकर आए क्योंकि गिल्टी कॉन्शियस हैं, अपराध बोध से ग्रसित हैं कि हमने 90 साल तक क्यों नहीं साथ दिया कांग्रेस का या जो आंदोलन था अपना फ्रीडम मूवमेंट का। फ्रीडम मूवमेंट के वक्त में ये लोग अंग्रेजों से मिले हुए थे। जब वन्दे मातरम् गाया जाता था, अंग्रेजों के खिलाफ था वन्दे मातरम्, अंग्रेज खुद भड़क गए थे। ये पूरे देश की एकता की बात कर रहे थे। वो खुद भड़क गए थे। उनका साथ इन्होंने दिया RSS के लोगों ने। इन्होंने RSS ने अपनी खुद का नया वो गीत बनाया जो शाखा में गाते हैं ये लोग।
तो दुनिया जानती है कि इनका गीत क्या है। इन्होंने क्यों नहीं उस वक्त में वन्दे मातरम् की बात करी ? अब जाकर आप बिल बना रहे हो? अब जाकर के वन्दे मातरम् की बात कर रहे हो। इनको क्या अधिकार है बात करने का सोनिया गांधी जी ने क्या दिया यहां गृह मंत्री जी आकर बोले हैं मैं कंडेम करता हूं गृह मंत्री को। आपका क्या संबंध है वन्दे मातरम् से? आपने कल परसों कानून बनाया। आपका संबंध यही है बस खाली। हमारा संबंध 90 साल से है। जब से गीत बनाया गया उसके बाद में रवींद्रनाथ टैगोर के सानिध्य में जब कमेटी बनी, पंडित नेहरू, सुभाष चंद्र बोस उसके अंदर थे, सबने मिलकर के तय किया कि क्या हमें वन्दे मातरम् में गाना है 90 साल पहले, और ये कल परसों की बातें करते करते ये विवाद पैदा कर रहे हैं।
सोनिया गांधी जी का औरा देश के अंदर अलग ढंग का है। जिस प्रकार उन्होंने यहां की पब्लिक लाइफ के अंदर भी भाग लिया हो, सामाजिक जिंदगी में भाग लिया हो, एक औरा बना दिया कि यह भारतीय संस्कृति की महिला की पहचान बना चुकी है सोनिया गांधी। उनके बारे में यह कमेंट करते हैं मोदी जी, अमित शाह जी। तो आप सोच सकते हो कि प्रधानमंत्री बोले, क्या बोले वो ? दिमागी नक्सल ! अब उनके मंत्री जो हैं वो रिजिजू वो सफाई देते फिर रहे हैं कि हमने अपोजिशन को नहीं कहा, उनको नहीं कहा, इनको नहीं कहा। किनको कहा फिर आपने? ये पूरे एक्सपोज़ हो गए हैं और इनका ग्राफ नीचे आ रहा है। धन्यवाद।