Shri Ashok Gehlot

Former Chief Minister of Rajasthan, MLA from Sardarpura

जोधपुर में मीडिया से बातचीत की

दिनांक
02/08/2026
स्थान
जोधपुर


पत्रकार : विधानसभा क्षेत्र हो या जोधपुर शहर, क्या क्या समस्याएं देखने में आईं ?

जवाब : देखिए हालात बड़े गंभीर हैं। अब बताइए आप यह पानी को देख कर कोई विश्वास कर सकता है ? मुझे विश्वास नहीं हो रहा है। यहां अंदर महिलाएं आई, बच्चे आए, नौजवान यह पानी लेकर आए।

पानी का हमने इंतजाम किया, इंदिरा गांधी कैनाल से पानी यहां तक आया, राजीव गांधी लिफ्ट बनाई। 40 -45 साल की मेहनत थी, अब भी पानी सप्लाई नहीं कर पा रहे।

मैं सुन रहा हूं कि महीने में 9 -10 दिन पानी आ रहा है जोधपुर के अंदर और मंत्रियों के स्टेटमेंट ऐसे आते हैं कि बड़ा लगता है यह क्या हो रहा है? मंत्रियों को जिम्मेदारी लेनी चाहिए कि अपनी सरकार से बात करें। कहां कमी है, नहीं है। हमारे अपने मंत्री जो जोधपुर के हैं, वह अगर इस प्रकार के कमेंट करेंगे पानी को लेकर भी समस्या ही लगती नहीं लोगों को, वह दुर्भाग्य है।

यह पानी देखिए आप, मुझे विश्वास नहीं हो रहा है। जिला प्रशासन से पता कर लें अगर यह गलत है तो। पी सकते हैं यह पानी ?

क्या क्या बताएं समस्या जो है, अब शहरी रोजगार हमने शुरू किया था। देश के अंदर शायद आंध्र प्रदेश के अलावा राजस्थान था, जिसने नरेगा जैसा पैटर्न बनाया शहरों के लिए। शहरों में गरीब रहते हैं बेचारे। सोते रहते हैं सड़कों पर, बाहर के आ जाते हैं। उनके लिए इतना वरदान साबित हुआ कि नगर निगमों ने खूब काम दिया और उनको रोजगार मिला और अब उनके पेमेंट नहीं हो रहे तीन चार छह महीने से।

पहले से गरीबी है। गरीबी में आटा गीला वाली कहावत है। पट्टे नहीं मिल रहे लोगों को। पट्टों की तो हमारे वक्त में जो अभियान चला था, जिस रूप में इतनी खूबसूरती से चला था, पूरे देश में तारीफ हुई। धारीवाल जी जो हमारे मंत्री थे, उन्होंने जमकर के कैबिनेट के अंदर कई फैसले करवाए। ईज़ी करवाया कि कैसे लोगों को राहत मिले। आज मैं मीडिया में पढ़ रहा था, बात आई भी है। क्या क्या छूट दी गई थी, मुझे भी याद नहीं रहता है। इतनी छूट दी गई थी। आराम हो गया लोगों को। अब यह नाटक कर रहे हैं। खाली नाम बदल दिया योजना का और ना प्रशासन का शहरों में ना गांवों में कोई पट्टे मिल पा रहे हैं। न्यूज़ में पढ़ा कोई 40- 50 पट्टे मुश्किल से मिले हैं कहीं पर एक दिन में।

अभी आए हैं यहां पर PHED के ठेकेदार, मैंने कहा भाई आप लोगों ने पहले तो धमकी दी सरकार को , ये मुझे पहले जयपुर में मिल चुके हैं, सारे डिपार्टमेंट चाहे PHED हो, अन्य डिपार्टमेंट हो, सबके पेमेंट बाकी पड़े हैं और इतने बड़े अमाउंट के हैं कि छोटे ठेकेदार बर्बाद हो गए, उधार लेकर काम करते हैं तो उन्होंने पहले धमकी दी कि हम स्ट्राइक पर जा रहे हैं तो सरकार ने बुलाकर कुछ मामूली पैसा रिलीज कर दिया। हमने दबाव दिया था उस वक्त। इनको दबाव से बुलाया गया और कहा गया नहीं आप धन्यवाद दीजिए सरकार का। एक विज्ञापन पूरा दिया पूरे पेज का लाखों रुपए खर्च हुए। इनको मजबूरी में देना पड़ा। मैंने इनको सुनाया, मैंने कहा आपने क्यों तो धमकी दी, क्यों आप धन्यवाद दे रहे हो, क्यों पैसा खर्च कर रहे हो? तो कहने का मतलब कि पेमेंट नहीं हो रहे सरकार में।

RGHS के अंतर्गत जो पेंशनर्स हैं उनका इलाज होना लगभग बंद हो गया है। अब बताइए क्या बीत रही है ? RGHS जैसी इतनी शानदार स्कीम जो मैंने CGHS में केंद्र में मंत्री था या MP था तब हमारे लिए लागू थी वहां पर, उसी पैटर्न को मैंने लागू यहां पर करी राजस्थान में। पत्रकारों के लिए उससे मिलती जुलती स्कीम है। सबका भट्टा बैठा दिया स्कीम का।

और तो और जो चिरंजीवी योजना थी फ्री इलाज की, पैसे मांगने लगे अस्पताल वाले कि हमारे पेमेंट नहीं हुई सरकार से। सरकार पेमेंट नहीं कर रही हमें इसलिए हम आगे पैसा वसूल कर रहे हैं। मैंने सरकार को एक बार कहा था भाई आप कम से कम कोई ऐसा सर्कुलर बनाएं कि अगर मजबूरी में पैसा नहीं दे पा रहे, और अस्पताल कोई वसूल कर रहा है तो पैसा वापस मिल जाए उनको। कोई हलचल नहीं, कोई जवाब नहीं।

और तो जो पेंशन, जो बेचारे रिटायर हो रहे हैं लोग बाग उनका खुद का पैसा है, GPF का भी है, PF का भी सब पैसा होता है, ग्रेच्युटी का है वो पैसा तक नहीं दे रही सरकार , रिटायरमेंट में। कुछ आवश्यकता होती है, घर के अंदर शादी भी होता है, कुछ भी होता है। लाइन लगी हुई है। मैंने सुना ACS फाइनेंस जो हैं उनके कमरे के बाहर ही लोग खड़े रहते हैं। यह स्थिति है।

और तो और 31 मार्च तक जो मैंने कल कहा मीटिंग के अंदर भी कि 31 मार्च तक जो बिल बन गए थे, ट्रेजरी में चले गए, रोका गया, वापस बुलाया गया। वापस प्रोसेस करो, इसलिए कि टाइम पास हो जाए, पेमेंट नहीं करना पड़े। यह स्थिति है और तो और जो एक्सीडेंट का मैंने कहा आपको ढाई हजार लोगों का, जो मर गया बेचारा एक्सीडेंट में उसका पेमेंट 5 लाख इम्मीडिएटली करना होता है सरकार को। हमने नियम बनाया है। परिवार दो लोग हैं, 10 लाख मिलेगा। ढाई हजार लोगों का पूरा फॉर्मेलिटी हो गई, बिल बन गए, सब कुछ हो गया। पेमेंट नहीं हो रहा उनको और एक हज़ार पांच सौ ऐसे हैं जो कि मतलब वापस भेज दिया जांच करने के लिए इसलिए कि जांच के बहाने हमें पेमेंट नहीं करना पड़ेगा। यह सरकार की स्थिति।

सड़कों के काम रुके पड़े हैं। कई जगह SP नहीं लग पा रहे हैं। जिले ऐसे भी है जहां SP नहीं लग पा रहे हैं। अपराध बढ़ते जा रहे हैं। पोस्टिंग नहीं दे रहे हैं, RPS से IPS बन गए बेचारे, अब कितनी सर्विस बाकी रही किसी को पता नहीं है। जिंदगी में देखता है कि मैंने तीस साल सर्विस करी है, बत्तीस साल करी है, अट्ठाईस साल करी है अब मुझे कम से कम एक बार चांस मिलेगा SP बनने का लाइफ के अंदर। IPS बनने का मतलब क्या हुआ? ये इनको गर्व होता है कि चलो मैं IPS बन गया तो मुझे पोस्टिंग मिलेगी। नहीं मिल रही है कहीं।

सवाल : आपने गांव का विकास सोचा था, कांग्रेस पार्टी ने लेकिन अब सरकार तीन सौ रुपया टैक्स लगाने जा रही है गांवों में सफाई के नाम पर।

जवाब : ये कुछ भी कर सकते हैं। सरकार नाम की चीज तो है नहीं। कौन तो सरकार को एडवाइस कर रहा है, किसके अनुभव काम ले रहे हैं, वो मेरी तो जानकारी में नहीं है।

सवाल : सर, आदर्श घोटाला जो हुआ उसको आपने पुरजोर तरीके से उठाया था।

जवाब : आदर्श भी था वो दूसरा क्या था नाम उसका, संजीवनी।

अब संजीवनी के लिए मैं कई बार कह चुका हूं मंत्री जी को चाहिए मुझसे बातचीत करें। हम दोनों मिलकर उनकी हेल्प करें। अगर हमारे मंत्री जी पर कोई आरोप है ही नहीं तो हम दोनों को मिलकर काम करना चाहिए ना इसके लिए। वो आगे क्यों नहीं आ रहे बताइए? कई बार मैं ऑफर कर चुका हूं। ये स्थिति है।

आदर्श घोटाला जो है अब जाकर सरकार ने कोई हलचल की है। उम्मीद बंधी है कि कोई राहत मिलेगी लोगों को। मैंने पढ़ा अखबार के अंदर इसको।


सवाल : सर, जादूगरी आज पूरे विश्व में कला कहलाती है, कल मुख्यमंत्री जी ने कहा कि अशोक गहलोत जी हेराफेरी करते हैं।

जवाब : हेराफेरी है। ये सरकार पूरी हेराफेरी से ही चल रही है। सरकार नाम की चीज है नहीं। ये सरकार खुद ही हेराफेरी कर रही है और लोगों को भ्रमित कर रही है और कुछ काम नहीं कर रही है। मैजिशियन की कला तो देश में ही नहीं अंतरराष्ट्रीय जगत में बहुत ही प्रसिद्ध कला है। उसका उद्गम स्थान कहते हैं हिंदुस्तान से ही हुआ था। सैकड़ों साल पहले, जादू कला का उद्गम जो है हिंदुस्तान से चला था दुनिया के मुल्कों में अमेरिका हो या इंग्लैंड हो। तो हमें तो गर्व होना चाहिए। अब मुख्यमंत्री को पता ही नहीं है इस कला बैकग्राउंड क्या है तो फिर वो ऐसे कमेंट करेंगे और क्या करेंगे? किसी ने कह दिया होगा उनके पीआर देखने वाले ने कि आप ये जुमला बोल दो। वो जुमला बोल गए। अपने मन से नहीं बोले थे मुझे मालूम है।

सवाल : पिताजी के साथ आप विदेश में इस कला का प्रदर्शन करने गए थे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर।

जवाब : वो छोड़िए, वो तो विदेश गए हम लोग। पिताजी जापान भी गए थे। हम हांगकांग भी गए थे। लंबी कहानी है।

सवाल : आपने सरकार चलाई। जादूगरी करते थे हर कामकाज, मॉडल लेकर आए।

जवाब : लोग प्यार से कहते हैं भाई जादूगर तो प्यार से, आप लोगों के प्यार, आपकी मोहब्बत, प्रदेशवासियों का विश्वास अटूट है। मेरी लाइफ की पूंजी यही है। मुझे जिंदगी में जो प्यार, जो विश्वास मुझे मिला है प्रदेशवासियों से, वो मिसाल बहुत कम है। मैं समझता हूं कि मैं सौभाग्यशाली हूं कि मुझे प्रदेश के लोगों ने कमी नहीं रखी। छत्तीस ही कौम के लोगों ने मुझे जो विश्वास दिया है, वोट दिया नहीं दिया परंतु उनका प्यार, उनकी मोहब्बत, उनका विश्वास अटूट रहा है। जब जाकर एक आदमी मेरी कम्युनिटी का है MLA विधानसभा में और वो माली कम्युनिटी का मैं खुद ही था कांग्रेस के अंदर ,तब भी मुझे मुख्यमंत्री रखा पाँच साल, दस साल, पंद्रह साल। ये आप समझ लीजिए इससे बड़ा क्या उदाहरण हो सकता है देश के अंदर कि जिस व्यक्ति का एक MLA हो और वो व्यक्ति जो है, चाहे सोनिया जी थी, चाहे राहुल जी थे, सबका सहयोग रहा, प्रियंका जी का रहा और मुझे तीन-तीन बार मुख्यमंत्री बना दिया। पहली बार जब बनाया होगा तो क्या सोचा होगा? कुछ तो देखा होगा । कुछ तो जो मैंने काम किया PCC के अंदर तो कुछ ऐसे काम हुए होंगे पार्टी के इंटरेस्ट के अंदर जिसके कारण से मुझे अवसर मिला। तो मैं समझता हूं कि वो मेरी जिंदगी की बहुत बड़ी एसेट है, पूंजी है। उसको साथ लेकर मैं आगे बढ़ना चाहता हूं।


सवाल : कांग्रेस संगठन अच्छा काम कर रहा है। बूथ स्तर पर पकड़ बना रहा है कांग्रेस संगठन। डोटासरा जी ने जिस तरह से कहा उसका अब जो सत्ता पक्ष है बीजेपी है वो उसको तोड़ मोड़ के पेश कर रहे हैं कि ये दोनों में फूट है। एक दूसरे को ऊपर नीचे करने की बात चल रही है, आप क्या कहेंगे ?

जवाब : देखिए विपक्ष का काम यही है। वो झूठे परसेप्शन बनाते हैं। मैंने एक बार बिड़ला ऑडिटोरियम में शिक्षकों के एक बड़े सम्मेलन में कह दिया कि भाई कि आप के यहां करप्शन होता है क्या, तो आप जानते हो कि शिक्षा विभाग में चाहे सरकार कांग्रेस की हो, बीजेपी की हो, कोई शिक्षा मंत्री बन जाए हिंदुस्तान भर के अंदर और प्रदेश के अंदर में, करप्शन होता ही होता है ट्रांसफर पोस्टिंग में। नई बात नहीं है। मैंने एक नेचुरल वे में कह दिया वहां पर। तो लोगों ने कहा होता है, तो डोटासरा जी खड़े होकर कहा भाई मैंने या मेरे किसी स्टाफ ने एक रुपए लिया तो बता दीजिए आप, तो कोई किसी ने सहमति नहीं व्यक्त की। उनके ऊपर कोई आरोप था ही नहीं। तब भी विपक्ष के लोग रोज डोटासरा जी पर आरोप लगाते हैं करप्शन के। आज तक मुझे किसी ने नहीं कहा गोविंद डोटासरा ने पैसे खाए हैं ट्रांसफर पोस्टिंग के अंदर। मुझे किसी ने नहीं कहा तो मैंने उन पर आरोप लगाया नहीं। अब कोई विपक्ष वाले उनके बारे में बोले तो आप समझ सकते हो विपक्ष की स्थिति क्या है राजस्थान के अंदर। विपक्ष वाले जानबूझकर के कांग्रेस के लोगों को लड़ाना चाहते हैं, गुमराह करना चाहते हैं और हमारे पीसीसी अध्यक्ष को बदनाम करना चाहते हैं, झूठा बदनाम करना चाहते हैं। तो कहने का मतलब कि विपक्ष का काम यही है। उसकी हमें चिंता नहीं करनी चाहिए।

सवाल : कल आपने कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को थोड़ा निराश किया। आपने कहा कि जो बार बार चौथी बार गहलोत सरकार, आपने कहा कि आपको नारे नहीं लगाना।

जवाब : ये तो मैं ढाई साल से कह रहा हूं लोगों को ,जहां जाता हूं, लगते हैं नारे, नई बात थोड़ी है कोई। कल तो अति उत्साह में लगा दिए। एक्शन का रिएक्शन हो गया। बाकी कोई ऐसा कुछ नहीं है कि मतलब कोई मैंने कोई नई बात कही हो। मुझे संकोच होता है। मैं आपको बता दूं, डोटासरा जी खुद साथ चल रहे थे हमारे।अभी जो उन्होंने पैदल मार्च किया, वह साथ चल रहे थे। लोग जिंदाबाद के नारे लगा रहे थे। अब तब भी मुझे संकोच होता है कि मेरे नारे लग रहे हैं और किसी के नहीं लग रहे तो मन में संकोच होता मुझे और मैं रोकता हूं, चलते चलते मीटिंग में बच्चों को या जो भी नारे लगाने वाले कार्यकर्ताओं को, मुझे खुद को संकोच होता है। पर यह ऐसी भावना होती है जिसको कोई रोक नहीं सकता। जिसके दिल में कोई बात है, कार्यकर्ता जबान पर लाते हैं। इसको कैसे रोक सकते हैं, बताइए आप?

सवाल : आपको डाउट है सर चौथी बार गहलोत सरकार पर।

जवाब : यह काम हमारा है ही नहीं। जो काम हमारे हाथ में नहीं हो, उसके बारे में हम बात करें ही क्यों ? यह काम सिर्फ हाईकमांड का होता है और लगातार हाई कमांड चुनाव के बाद में, चुनाव के पहले जो माहौल देखती है प्रदेशों के अंदर, कोई प्रदेश हो, पब्लिक का क्या मिजाज है, जीत के आए MLA क्या प्रकट कर रहे हैं, क्या अपनी राय दे रहे हैं? हाईकमांड सर्वे भी करवाता है। सब जगह राज्यों के अंदर लगातार सर्वे चलते रहते हैं। हर पार्टी के। खाली कांग्रेस की बात नहीं है, तो उनके पास तो पल पल की खबर रहती है। पांच साल के सर्वे चलते हैं, राज्यों में क्या काम हो रहा, नहीं हो रहा है। सब सर्वे चलते हैं। उम्मीदवारों के सर्वे भी होते हैं। अब तो हमारे पास संस्थागत तरीके से राहुल गांधी जी ने टीम बना दी है, जिसका काम सर्वे करना ही है। टिकटों के लिए भी, तो कहने का मतलब कि यह काम उनका है। वो सब देखकर फैसला करते हैं। इसलिए इन बातों को लेकर चर्चा होनी नहीं चाहिए। मेरा मानना है कि हम सब मिलकर काम करें। सरकार लाना डेमोक्रेसी को बचाने के लिए, राजस्थान में गवर्नमेंट बनना कांग्रेस के लिए आवश्यक है। देश की डेमोक्रेसी बचाने के लिए भी जरूरी है कि हमारी भागीदारी हो, जैसे हमने 11 सीटें जीता के भेजी यहां से । वो भी हमारे जो हमने काम किए थे पांच साल सरकार नहीं आ पाई कुछ कारणों से। कुछ कारण रहे, कुछ लोगों ने बदमाशी की होगी। कुछ भी किया पर सरकार हमारी आ नहीं पाई। आ सकती थी उस वक्त, हर आदमी की जबान पर है कि सरकार तो आनी थी हमारी और दुर्भाग्य से नहीं आई।


अब हमारा फर्ज बनता है कि इस बार जो है हालात देश में बहुत गंभीर हैं, ये फासिस्ट लोग हैं। इनका यकीन डेमोक्रेसी में नहीं है। पता नहीं देश को कहां ले जाएंगे। परिसीमन अपने हाथ में लेना चाहते हैं ये। असम में लिया हाथ में, बर्बाद कर दिया कांग्रेस को वहां पर। किसी कीमत पर यह एलाऊ नहीं करना चाहिए इनको। तमाम विपक्षी पार्टियों को सोचना चाहिए जो इनके साथ में है, पार्टियां NDA में उनको सोचना चाहिए कि अगर यह काम करवा दिया हमने, जैसे खत्म कर रहे हैं सब पार्टियों को जगह जगह, अकाली दल को हो या वो वहां पर उड़ीसा के अंदर पार्टी हो, शिवसेना को खत्म कर दिया महाराष्ट्र के अंदर, नीतीश कुमार को खत्म कर दिया। ये इनके पार्टनर जो बने हुए हैं NDA में उनको कमजोर करेंगे ये लोग। अगर इनके हाथ में आ जाए परिसीमन तो बर्बाद कर देंगे ये, इसलिए किसी कीमत पर नहीं आना चाहिए और मेरा मानना है कि राजस्थान वो राज्य है जहां पर सरकार आना निश्चित है। कोई रोक नहीं सकता यहां पर। पब्लिक तो इंतजार कर रही है चुनाव कब आए? भयंकर गुस्सा है और हर गांव में चर्चा हमारी स्कीम्स की होती है। अब किसी को नहीं सुनाई देता है तो मैं नहीं कह सकता। किसी को अगर सुनाई नहीं देवे कानों से, आंखों से देखे नहीं, उसका मैं नहीं कह सकता। परंतु हर गांव में एक ही चर्चा है। हमारी स्वास्थ्य योजना हो, हमारी शिक्षा योजना हो या हमारे इंग्लिश मीडियम के स्कूल हैं, डोटासरा जब शिक्षा मंत्री थे, तभी आई है ना ये तो। तो सारे राजस्थान में आज कांग्रेस की योजनाओं, पेंशन हो, कोई योजना हो, गांव वालों को हमेशा का याद है। पशुओं की दवाएं फ्री, पशुओं का इलाज फ्री, उनका इंश्योरेंस कर दिया हमने। लंपी रोग आ गया। अभी मेरे परसों कोई मिला था,चार गाय मर गई लंपी रोग से। एक -एक गाय का ₹40,000 मिला उनको। कोई सोच सकता है क्या?

ऐसी -ऐसी योजना हमने दी है जो बिना मांगे हुए लोग कहते थे साहब आपके यह स्कीम आती कैसे दिमाग के अंदर, ये स्थिति बन गई थी। वो काम हमने किया है तो लोग भूल सकते हैं क्या इस बार? अगली बार सरकार आना निश्चित है। ये मान के चलो आप लोग, भजनलाल जी कुछ भी बोलें चाहे इनके जो लोग हैं, जो मुख्यमंत्री जी को और हाई कमांड को खुश करने के लिए बोलना पड़ता है, आत्मा उनकी मानती है। प्राइवेटली मिलेगा कोई RSS का आदमी आपको, आप पत्रकार लोग हो, आपको मैं चैलेंज करता हूं, RSS का BJP का आदमी कोई मिले आपको, जो मिलते होंगे, आप उनको अकेले में पूछ लीजिए। वो क्या बोलेगा मालूम पड़ जाएगा। ओके।

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