मीडियाकर्मियों से बातचीत।
दिनांक
24/06/2026 |
स्थान
जोधपुर
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पत्रकार का सवाल: अस्पतालों की व्यवस्थाओं और स्वास्थ्य योजनाओं की वर्तमान स्थिति पर आपका क्या कहना है?
जवाब: जैसा कि अभी आप सबके सामने आया है, न तो दवाइयाँ आ रही हैं और न ही कोई सप्लाई हो रही है। आज जनता बेहद दुखी और परेशान है, और योजनाएँ सिर्फ कागज़ों तक सिमट कर रह गई हैं। यह बहुत गंभीर और चिंताजनक मामला है। हमारी सरकार की यह इतनी शानदार स्वास्थ्य योजना थी जिसकी तारीफ़ आज भी पूरे हिंदुस्तान और हर राज्य में हो रही है। शायद दुनिया के किसी भी कोने में ₹25 लाख तक का मुफ़्त इलाज नहीं मिलता, जहाँ एमआरआई, सीटी स्कैन, दवाइयाँ और डायलिसिस सब कुछ मुफ़्त था।
अब आप बताइए कि उसके बाद आज ऐसी बदतर स्थिति क्यों बन रही है? हम जहाँ भी जाते हैं, लोग हमसे शिकायत करते हैं कि अस्पताल वाले इलाज के बदले पैसे माँग रहे हैं। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि वर्तमान सरकार से निजी और सरकारी अस्पतालों को समय पर भुगतान (Payment) नहीं मिल रहा है, और इस लापरवाही का हर्जाना वे आम जनता से वसूल रहे हैं। यह भला कौन सा तरीका हुआ? योजना अभी भी लागू है, इसे बंद नहीं किया गया है, लेकिन सरकार से बजट न मिलने के कारण दवाइयाँ मिल नहीं रही हैं और ऑपरेशन ठप पड़े हैं। जब अस्पतालों को सरकार से पैसा नहीं मिल रहा है, तो वे जनता से पैसे माँग रहे हैं। इसमें भला उस गरीब और बेकसूर जनता का क्या दोष है? यह आज का सबसे महत्वपूर्ण और विचारणीय बिंदु है।
पत्रकार का सवाल: कल यमुना जल समझौते को लेकर मुख्यमंत्री जी एक बार फिर दिल्ली गए थे और वहाँ कोई मीटिंग हुई है, इस पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है?
जवाब: यह अच्छी बात है, मैं तो इसका स्वागत करता हूँ। मैंने पहले भी कहा था और आज फिर दोहराता हूँ कि जिस दिन आप राजस्थान में यमुना का पानी ले आएँगे, मैं खुद मुख्यमंत्री निवास पर आकर आपको माला पहनाऊँगा। मैंने नीमकाथाना में भी यही घोषणा की थी कि 'मुख्यमंत्री जी, अगर आप जनता का यह सपना पूरा कर दें, तो मैं खुद आपके घर आकर आपका अभिनंदन करूँगा।' मैं अपने इस वादे पर आज भी पूरी तरह कायम हूँ। लेकिन बात सिर्फ दिल्ली या चंडीगढ़ जाकर बार-बार बैठकें करने से नहीं बनेगी, हमारा सीधा सरोकार ज़मीन पर पानी आने से है, मीटिंगों से नहीं।
पत्रकार का सवाल: भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा है कि गहलोत साहब बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं, जबकि उनके खुद के राज में ज़बरदस्त भ्रष्टाचार हुआ था?
जवाब: नहीं, मैंने आज सुबह अखबारों में उनका बयान पढ़ा, जो कि बेहद अजीब और समझ से परे था। उन्होंने आपत्ति जताई कि मैंने चुने हुए जनप्रतिनिधियों को 'घोड़े और गधे' क्यों कहा। मैं स्पष्ट कर दूँ कि मैंने आम जनप्रतिनिधियों को ऐसा नहीं कहा; मैंने यह शब्द उन लोगों के लिए इस्तेमाल किए हैं जो बिक चुके हैं या बिक रहे हैं। जो विधायक (MLA) और सांसद (MP) जनता का भरोसा तोड़कर 10 करोड़, 25 करोड़ या 50 करोड़ रुपये में अपनी निष्ठा बेच रहे हैं, उनके लिए मैंने 'बिकने वाले घोड़े, गधे, भैंस और बकरी' जैसे चार शब्दों का प्रयोग किया था।
इसमें भला गलत क्या है? जनता जिन पर भरोसा करके, अपना कीमती वोट देकर उन्हें सदन में भेजती है, वे पैसों के लालच में आकर बिक जाते हैं। आज बंगाल और महाराष्ट्र में जो कुछ हो रहा है, वह सबके सामने है। महाराष्ट्र में शिवसेना के 28 में से 20 सांसद चले गए, 80 में से 60 विधायक पाला बदल गए और अभी कल ही 8 में से 6 सांसद और चले गए। ऐसे बिकने वाले लोगों की पूजा तो की नहीं जा सकती! मदन राठौड़ जी दरअसल सिर्फ अपने दिल्ली बैठे वरिष्ठ नेताओं (Seniors) को खुश करने और अपनी नंबरिंग बढ़ाने के लिए इस तरह की बयानबाज़ी का प्रयास कर रहे हैं।
पत्रकार का सवाल: सर, चर्चा है कि केंद्र की तर्ज पर राज्य में भी मंत्रिमंडल का विस्तार या बदलाव होने वाला है?
मेरा जवाब: देखिए, यह हमारा काम नहीं है, यह पूरी तरह से मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है। लेकिन मैं व्यक्तिगत तौर पर यही चाहता हूँ कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जी ही अपने पद पर बने रहें। आजकल मीडिया में लगातार यह चलने लगा है कि 'ये हट रहे हैं, वो हट रहे हैं।' मैं चाहता हूँ कि वे बने रहें; वे एक भले आदमी हैं, व्यवहार कुशल हैं और सभी से बेहद सम्मान के साथ बात करते हैं। ऐसे शालीन व्यक्ति को ही मुख्यमंत्री का पद शोभा देता है और वे विपक्ष के नाते हमें भी सूट करते हैं।
पत्रकार का सवाल: आरपीएससी (RPSC) और माध्यमिक शिक्षा बोर्ड जैसी महत्वपूर्ण संस्थाओं में जो नई नियुक्तियाँ हो रही हैं, उनमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े लोगों को बैठाया जा रहा है, इस पर आपकी क्या राय है?
मेरा जवाब: यह बात तो राहुल गांधी जी बार-बार पूरे देश के सामने उठा रहे हैं, और यह स्थिति सिर्फ राजस्थान की नहीं बल्कि पूरे हिंदुस्तान की है। आज तमाम शिक्षण संस्थाएँ, विश्वविद्यालय और कॉलेज इनके सीधे निशाने पर हैं, जहाँ आरएसएस और भाजपा के खास एजेंडे के तहत नियुक्तियाँ की जा रही हैं। ये लोग अपनी एक ऐसी विचारधारा को थोप रहे हैं जो देश के संविधान और लोकतंत्र के बुनियादी सिद्धांतों के पूरी तरह खिलाफ है।
इस तरह ये लोग लोकतांत्रिक मूल्यों की धज्जियाँ उड़ाकर देश के लोकतंत्र को ही कमज़ोर कर रहे हैं। तमाम प्रमुख और स्वायत्त शिक्षण संस्थाओं में अपने ही लोगों को भरना इनका सबसे टॉप एजेंडा बन चुका है। यह देश के भविष्य के लिए बेहद खतरनाक और चिंताजनक स्थिति है। चूँकि आज सत्ता उनकी है, राज्यपाल उनके हैं, इसलिए नियुक्तियाँ भी वही कर रहे हैं। यह देखना हमारी मजबूरी है, लेकिन मैं पूरी ज़िम्मेदारी के साथ कह सकता हूँ कि इस वैचारिक दखलंदाज़ी से देश के ताने-बाने को बहुत बड़ा नुकसान हो रहा है।