Shri Ashok Gehlot

Former Chief Minister of Rajasthan, MLA from Sardarpura

केरल जाने से पूर्व , जयपुर एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत

दिनांक
30/03/2026
स्थान
जयपुर


केरल जाने से पूर्व , जयपुर एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत :

भाजपा सरकार के मिस गवर्नेंस को एक्सपोज़ करने वाली मेरी सोशल मीडिया सीरीज़ इंतज़ार शास्त्र से जुड़े सवाल पर जवाब :

हम लोगों ने प्रारंभ किया जिससे कि जो प्रोजेक्ट करोड़ों रूपए लगा कर बन चुके हैं वो चालू क्यों नहीं हो रहे हैं ? ये महात्मा गांधी इंस्टिट्यूट ऑफ गवर्नेंस एंड सोशल साइंस कॉमर्स कॉलेज के सामने कितनी शानदार बिल्डिंग बनी ₹2-2.5 सौ करोड़ लगे होंगे, पड़ी हुई है, ऐसे कितने उदाहरण है, आई.पी.डी टावर भी है , हमने पूरी एक सीरिज चलाई है जिससे सरकार का ध्यान जाए और वो वो संस्थाएं प्रारंभ हो ,युवा पीढ़ी को, छात्रों को उनका लाभ मिले, पब्लिक को लाभ मिले इस प्रकार के प्रोजेक्ट हमारे हैं।

ट्रेफिक जाम रहता है जयपुर में। हमने हब बना दिया कोचिंग क्लासेज के लिए। सब वहां शिफ्ट होते तो ट्रेफिक कम होता, जाम नहीं लगता। तो इस प्रकार हमने जो हमारे वक्त में प्रोजेक्ट थे, उनको हमने पूरी तरह बना करके काम शुरू कर दिया। टेंडर निकल गए, वर्क ऑर्डर हो गए, काम शुरू हो गया।

कुछ काम आधे हो गए, कुछ के ज्यादा हो गए, कुछ के कम हो गए। अभी दो साल हो गए, इनको कोई जवाब दे नहीं रहे। आज जो जवाब दिया, पत्रिका में आया है, आपको पढ़ कर के हंसी आएगी कि गवर्नेंस सो रही है, क्या हो रहा है आज राजस्थान में।

जो हमने सात पॉइंट दिए थे इंतजार शास्त्र के सातों पॉइंट का आप देखो उसके अंदर जवाब मुख्यमंत्री जी का भी है मदन राठौड़ साहब का भी है मंत्री जी का भी है और सबसे वरिष्ठ नेता हमारे राजेंद्र राठौड़ साहब। हम इंतजार करें कब राज्यसभा चुनाव का डिक्लेरेशन हो और कब इनका नंबर लगे हम तो ये इंतजार उनके लिए दुआएं रखते हैं और वो इतने अनुभव होने के बावजूद भी आज जो जवाब सबने दिए गोलमाल इससे बड़ी शर्म की बात सरकार के लिए कोई हो नहीं सकती कोई हो ही नहीं सकती|

अरे सरकार को अगर विपक्ष पूछ रहा है भई कि हमारे वक्त में प्रोजेक्ट थे आप चालू करो, बन गए हैं, जल्दी पूरा कर दो उसमें आप जवाब गोलमाल दे रहे हो उनका जवाब दे ही नहीं रहे हो ,आप और ढंग के एंगल दे रहे हो उसको तो इससे बड़ी शर्म की बात क्या होगी सरकार के लिए।

बेटों को सरकार में दखल नहीं करना चाहिए के सदंर्भ में पूर्व में दिए मेरे बयान पर टिप्पणी :

कल मैंने बेटों के लिए कह दिया तो मैंने कहा बेटों को सरकार में दखल नहीं करना चाहिए ये मत छूट दो बेटों को बेटियों को सालो को सालियों को किसी परिवार वालों को उसमें आप ये दखल करने की इजाजत मत दो| आप उनको राजनीति में लाओ वो हमारे एग्जांपल दे रहे सोनिया जी , मेरे, आप लाओ ना उनको राजनीति में उनका स्वागत करेंगे अगर हमारी वर्तमान पीढ़ी जो है चाहे किसी पार्टी की है उनके परिवार के लोगों को मोटिवेट भी करना चाहिए।

अगर कोई छात्र युवा आ सकता है कोई परिवार का तो पॉलिटिक्स के छात्र भी आ सकते हैं उनके बच्चे भी आ सकते हैं , खाली आप आउट ऑफ टर्न उनको मदद नहीं मिले इतनी तो बात है या किसी का हक मत मारो ये तो होता है|

बाकी आने में क्या हर्ज है अगर मान लो परिवार होगा पारिवारिक पॉलिटिकल पृष्ठभूमि का उनके परिवार के लोग आएंगे अगर उनसे अनुभव काम आएगा तो अनुभव तो पब्लिक के काम आएगा ना तो हम क्यों डिसकरेज करें बच्चों को|

सब आए बेटा बेटी कोई आओ पर सरकार में दखल करेंगे करप्शन करवाएंगे, बदनामी किसकी होगी मुख्यमंत्री जी की होगी मंत्रियों की होगी, हो भी रही है क्या ये खबरे नहीं पहुंचती है मुख्यमंत्री के पास में ?

जबसे सरकार बनी है तबसे ये काम शुरू हो गया बेटे बेटियों का क्या मतलब भाई और खुले आरोप लग रहे हैं हम तो पहली बार बोल रहे हैं हमने प्रयास किया कि पर्सनली हम लोग कन्वे करें कि देखिए बदनामी बहुत हो रही है। हमारे प्रयास काम नहीं आए तब मुझे बोलना पड़ा है अब मैं कहना चाहूंगा बहुत बदनामी होती है, बेटों को दूर रखो।
मैंने अपने बेटे को तो मुख्यमंत्री निवास में नहीं रखा पूरे परिवार को किराए का मकान लेकर वो रहे पांच साल। आप बता दीजिए कि ये उदाहरण हम लोग दे रहे हैं हम लोगों का उदाहरण दे रहे हैं चाहे वो आर.सी.ए के चेयरमैन बने हो तो सी.पी जोशी जाने वो जाने भैया मैंने तो एक सेकंड भी टाइम नहीं दिया उसके अंदर, मैं तो पड़ा भी नहीं हूं। और अगर वो चुनाव लड़े हैं पार्टी ने टिकट दिया उसको,ऐसी स्थिति बनी होगी उनको टिकट मिला वहां पर उससे इन बातों का क्या संबंध जो मैं बोल रहा हूं मैं तो कह रहा हूं बेटे बेटियों का आप सरकार में दखल करने की इजाजत मत दो ये मैंने कहा है।
और जो यह स्टेडियम वाला, श्री अनिल अग्रवाल से बात करके हम लोगों ने दो ढाई सौ करोड़ का प्रोजेक्ट है उनसे इमदाद ले रहे थे हम लोग, वो स्ट्रक्चर खड़ा हो गया है, बंद कर दिया, लाखों बच्चे जो हैं क्रिकेट के लिए रात दिन एक करते हैं, आम लोगों में लोकप्रिय है। मैं चाहे फुटबॉल का या कबड्डी का पक्षधर हो सकता हूं क्रिकेट का पक्षधर मैं नहीं रहा होऊंगा कभी मान लो ठीक है, वो अलग मेरी अलग बात है पर एज़ ए मुख्यमंत्री मेरी ड्यूटी है ना जो जनता क्या चाहती है? युवा पीढ़ी क्या चाहती है? उन खेलों को प्रोत्साहन दे हम लोग। वो मैंने प्रयास किया, वो अधूरा पड़ा हुआ है। दो साल हो गए आरसीए के चुनाव ही नहीं हो रहे हैं और आपस में लड़ रहे हैं ये लोग। कौन लड़वा रहा? कौन भिड़वा रहा? मुख्यमंत्री की नॉलेज में नहीं है क्या? कोई बोल नहीं रहा है। चुनाव नहीं करवा रहे हैं विश्वविद्यालय के, कॉलेज के। विश्वविद्यालय चुनाव क्यों नहीं करवा रहे? आप नई पीढ़ी को प्रोत्साहन नहीं देना चाहते हैं क्या? ये तमाम बातें जो हो रही है न वो बहुत ही बुरी हो रही है। इसलिए मैंने दो बातें कही थी। मैं आज भी कहना चाहूँगा मुख्यमंत्री जी से। मुख्यमंत्री जी आप भले आदमी हो, कृपा करके आप अपनी पकड़ बनाओ, इन सबको टाइट करो और जो आपके सलाहकार हैं उनको वापस उनको एक्ज़ामिन करो। ये आपको जिस प्रकार से जवाब आज आए हैं उससे मैं बहुत निराश हुआ हूँ। जनता में बहुत आक्रोश है। पूछ कुछ रहे हैं हम लोग ,जवाब कुछ और दे रहे हैं। ऐसे लोग ही इनके सलाहकार होंगे तो इनको बर्बाद करके रख देंगे ये मेरा मानना है।
कांग्रेस द्वारा आज राजस्थान दिवस मनाए जाने पर सवाल का जवाब:

कांग्रेस क्या मना रही है, हर राज्य के अंदर देश भर के अंदर उसी दिन मनाया जाता है जिस दिन उनका गठन हुआ था। पीएम खुद करते हैं ट्वीट करते हैं। आज तो पता नहीं उन्होंने किया कि नहीं किया है। पर ये नई-नई बातें लाकर इनकी राजनीति विकास की तो है नहीं, इनकी राजनीति धर्म के नाम पर बंटवारा करने की है। कब तक करेंगे? कब तक करेंगे? जनता समझ चुकी है कि ये कब तक हमें गुमराह करेंगे।

मीडिया द्वारा आरसीए में विधायकों के बेटों को एडजस्ट करने पर सवाल का जवाब :

वो तो मैंने कहा ना आपको कि मुख्यमंत्री खुद दबाव में काम कर रहे हैं वरना ये स्थिति बनती नहीं। मुख्यमंत्री जी दबाव में काम कर रहे हैं। मंत्रीमंडल इनका बना हुआ है पता नहीं कितने मंत्री इनको ईमानदारी से साथ देते हैं, आई डोंट नो, मुझे पता नहीं। वो कब तक आप भारत सरकार के सरकार जो वहां की है उनके आप सलाह लेने का काम करते जाओगे। ये तो गलत बात है ना। ऐसा माहौल बन गया है हर काम के लिए पूछना पड़ता है दिल्ली से। ये पब्लिक में धारणा बनना भी गलत है, ये भी मैं मुख्यमंत्री जी को कन्वे करना चाहूँगा कि ये धारणा मत रखो। बार-बार पीएम से मिलते हो।आप मिलो पर आप जैसे जोधपुर गए परसों ही। जोधपुर में बड़े प्रोजेक्ट हैं, वो मुख्यमंत्री के लायक ही हैं वो मान लो। वो तो उद्घाटन कर सकते थे ये। लाइब्रेरी बड़ी है सुमेर पब्लिक लाइब्रेरी। स्पोर्ट्स की इंस्टीट्यूट बन गई वहां पर, फिनटेक यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट बन रही है वहां पर ₹600 करोड़ से। बिल्डिंग बन गई हैं। अब ये काम क्यों नहीं आगे बढ़ा रहे, वो तो मुख्यमंत्री खुद ही उद्घाटन कर सकते हैं और हम तो स्वागत करेंगे मुख्यमंत्री जी का।

इतने ये क्या कहना चाहिए तानाशाह प्रवृत्ति के लोग हैं, इनकी सोच वही है। हम सरकार में आते हैं तो बीजेपी के एमएलए, एमपी को बुलाते हैं। पत्थर पर नाम लिखवाते हैं, इनवाइट करते हैं। वसुंधरा जी हो या भजनलाल जी हो। मैं खुद मुख्यमंत्री रहा हूँ। जोधपुर मेरी कॉन्स्टिट्यूएंसी में कोई काम किए होंगे इन्होंने, मुझे आज तक बुलाया ही नहीं गया होगा। आप बताइए, इतना बड़ा अंतर सोच है कांग्रेस में और बीजेपी-आरएसएस के अंदर। कोई जवाब दे सकते हैं ये लोग हमें? बुलाते ही नहीं है, कमाल है भाई। अभी भी हो रहा है।

पंचायत चुनाव के इंतजार पर सवाल का जवाब:

अब देखिए पंचायत चुनाव हमारे वक्त में स्ट्राइक हो गई थी कर्मचारियों की, तो हमने भी रिक्वेस्ट की थी कोर्ट से, स्ट्राइक में चुनाव कैसे करवाएंगे। तो फैसला हमारे खिलाफ आ गया कि नहीं चुनाव तो आपको संविधान में जो है उसको आपको ध्यान में रखकर करवाना ही पड़ेगा। हमें उस स्ट्राइक के अंदर आपस में और लोगों को ऑर्गेनाइज करके, जो चुनाव में भाग नहीं लेते उनको रिक्वेस्ट करके सबको साथ लेकर हमने चुनाव करवाया, हम कामयाब भी हो गए उसमें। ये बहानेबाजी कर रहे हैं। आज वो मेरे ख्याल से पत्रिका में आया है फ्रंट पेज पे न्यूज आई है।
मिस्टर सिसोदिया कोई हैं, शायद उनका ही वो आर्टिकल होगा अंदाज है मुझे याद है शायद कोई होगा। इतना अच्छा विश्लेषण उसने किया है पूरे चुनाव का। कैसे इलेक्शन, जो ये चुनाव आयोग है। कैसे कोर्ट ऑफ कंडक्ट से, कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट से बचने के लिए वो बार-बार सरकार लिख रहा है कि भाई मैं बच जाऊं कम से कम सरकार पे आए। सरकार सरकार ही होती है, वो तो राइट लेफ्ट करती रहती है। चुनाव टालने के लिए रात दिन एक किए हुए हैं। ओबीसी का टर्म खत्म हो रहा है कल और क्यों नहीं आपने ली अभी पहले रिपोर्ट? क्यों नहीं ली आपने रिपोर्ट? ये जान बूझकर इतने लगता है इनके खिलाफ इतना माहौल बन चुका है राजस्थान के अंदर, मुख्यमंत्री खुद के खिलाफ भी, सरकार के खिलाफ भी। उससे बचने के लिए मैं समझता हूँ ये तरीके निकाल रहे हैं जो कि संविधान की भावना के खिलाफ है। कैसे मुख्यमंत्री रह पाएंगे ये अगर चुनाव नहीं करवा पाएंगे तो क्या होगा बताओ? संविधान का क्या होगा? ये बात तो दिल्ली के जो केंद्रीय नेता हैं , प्रधानमंत्री जी हैं, अमित शाह जी हैं और जो इनके नेता हैं, उनके सोचने की बात है ये कि राजस्थान गवर्नमेंट चुनाव क्यों नहीं करवा पा रही है। ये संविधान की मूल भावना का उल्लंघन कर रही है। इस पर विचार करना चाहिए उनको पर ये मेनिपुलेट कर रहे हैं लोग।

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