Shri Ashok Gehlot

Former Chief Minister of Rajasthan, MLA from Sardarpura

प्रदेशवासियों के हित में राइट टू हेल्थ के नियम बनाने को लेकर वर्तमान सरकार की उदासीनता पर प्रेस के साथियों से बातचीत:

दिनांक
12/02/2026
स्थान
जयपुर


प्रदेशवासियों के हित में राइट टू हेल्थ के नियम बनाने को लेकर वर्तमान सरकार की उदासीनता और आज विधानसभा में सरकार के कमेंट पर प्रेस के साथियों से बातचीत:

देखिए, जब से यह सरकार आई है, तब से इसकी प्राथमिकताओं में स्वास्थ्य शामिल ही नहीं है। ये लोग चिरंजीवी योजना को भी नहीं समझ पाए, फ्री मेडिसिन को नहीं समझ पाए। आज स्वास्थ्य की चिंता हर घर और हर गांव में होती है। यह समझ से परे है कि फ्री मेडिसिन, फ्री जांच, फ्री इलाज और फ्री ऑपरेशन जैसी योजनाएं ,25 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा , हिंदुस्तान के किसी भी राज्य में नहीं है, और शायद दुनिया में भी नहीं होगा।

फ्री और कैशलेस इलाज की जो योजना हमने शुरू की, वह पूरे देश में लोकप्रिय हुई। कई राज्यों ने किसी न किसी रूप में इसे अपनाया, किसी ने 20 लाख रुपये तक का बीमा कर दिया, जैसे पंजाब ने। तो सवाल यह है कि ये लोग इसे समझ क्यों नहीं पा रहे हैं? हमने ‘राइट टू हेल्थ’ जैसा अधिकार आम जनता को दिया और कहा कि किसी सिफारिश की जरूरत नहीं है, यह आपका अधिकार है , सरकार आपकी सेहत की जिम्मेदारी लेगी। इतना बड़ा क्रांतिकारी फैसला हमने किया। इसके बारे में यदि मंत्री जी या सरकार ने जो कमेंट किए वो दुर्भाग्यपूर्ण हैं, मैं उसको कंडेम करता हूं। इसे कमजोर करने के बजाय और मजबूत किया जाना चाहिए था। राइट टू हेल्थ के नियम-कानून बनाकर अब तक इसे लागू कर देना चाहिए था और स्ट्रांग करना चाहिए था। अगर ऐसा करते, तो आपका नाम पूरे देश में होता। आज राजस्थान की योजनाओं की चर्चा हर राज्य में हो रही है, लेकिन यहां न जाने किस प्रकार से बिहेव कर रहे हैं।

जब से सरकार आई है, दो साल हो चुके हैं। जो भी मुझसे मिलने आता है, उनमें से कई लोग किस्से बताते हैं कि किसी का हार्ट ऑपरेशन हुआ, किसी के घुटने बदले गए, किसी का टीबी का इलाज हुआ, किसी का कैंसर का इलाज फ्री में हुआ। 80 हजार रुपये तक के इंजेक्शन मुफ्त मिले, पूरे ऑपरेशन मुफ्त हुए। इसलिए समझ से परे है कि शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी चीजों को सरकार को लॉन्गटर्म के लिए, आने वाली पीढ़ियों के लिए मजबूती से आगे बढ़ाना चाहिए।
शिक्षा के क्षेत्र में भी हमने अंग्रेजी माध्यम के स्कूल खोले, लेकिन उन्हें भी कमजोर कर दिया गया। इनकी प्राथमिकता में शिक्षा भी नहीं है। हम हिंदी के पक्षधर हैं, लेकिन आज दुनिया अंग्रेजी से जुड़कर आगे बढ़ी है। मोबाइल फोन, आईटी और कंप्यूटर का युग है। बच्चों का भविष्य बनाना है तो अंग्रेजी शिक्षा भी जरूरी है। लेकिन सरकार की प्राथमिकताओं में न सिंचाई है, न पानी, न बिजली, न शिक्षा, न स्वास्थ्य और न सड़कें।

हमारी योजनाओं को कमजोर किया जा रहा है। अन्नपूर्णा योजना एक अच्छी योजना थी। उस पर मुख्यमंत्री के रूप में मेरी फोटो लगी थी, आप उसे हटा देते और भजनलाल जी की फोटो लगा देते, लेकिन योजना बंद क्यों कर दी? हर शहर और गांव में इंदिरा रसोई चल रही थी। मजदूर, छात्र, आम नागरिक और गरीब लोग वहां भोजन करते थे। अब वह योजना कमजोर होकर ठप पड़ी है। ऐसी कई योजनाएं हैं जो बंद पड़ी हैं। जयपुर में ट्रैफिक जाम की स्थिति है, और हमने जो तकरीबन 100 करोड़ रुपए लगा कर कोचिंग हब बनाया था, वह भी पड़े पड़े खराब हो रहा है।

सरकार दो साल बनाम पांच साल की बातें करती है। किसी ने मुख्यमंत्री जी को पर्ची पकड़ा दी या ब्रीफ कर दिया कि दो साल की तुलना पांच साल से करें। हमारे डेढ़ साल तो कोविड में निकल गए। उसके बावजूद हमने योजनाएं बनाई और काम किया। हमारी सरकार किन परिस्थितियों से गुजरी, आप जानते हैं। सरकार गिरते-गिरते बची, वह भी एक इतिहास बना। कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गोवा में सरकारें चली गईं, लेकिन हमने राजस्थान में प्रधानमंत्री मोदी जी और अमित शाह जी के मंसूबों को ध्वस्त कर दिया। 34 दिन होटल में रहे, एक भी एमएलए हमें छोड़कर नहीं गया। उन्हें कितने ऑफर दिए गए, आप कल्पना नहीं कर सकते।

कहने का अर्थ यह है कि इस सरकार के दो साल प्रदेश के लिए नुकसानदायक रहे हैं। हर गांव में स्थिति खराब हो रही है। गवर्नेंस नाम की कोई चीज नजर नहीं आती। मैं मुख्यमंत्री जी से राजनीति से हटकर कहना चाहता हूं कि आप अपनी टीम गांवों में भेजिए और वास्तविक स्थिति का आकलन कराइए। यदि आप फीडबैक लेकर सुशासन देंगे, भ्रष्टाचार रोकेंगे, तो फायदा जनता को होगा। हमें जनता की चिंता है। अगर सरकार अच्छा काम करेगी, तो लाभ जनता को ही मिलेगा। विपक्ष का कर्तव्य है कि वह जनता के हित की बात उठाए।

धन्यवाद।

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