Shri Ashok Gehlot

Former Chief Minister of Rajasthan, MLA from Sardarpura

श्रीमती सोनिया गांधी जी की पुस्तक को लेकर मीडिया से वार्ता-

दिनांक
28/08/2026
स्थान
जयपुर


श्रीमती सोनिया गांधी जी की पुस्तक को लेकर मीडिया से वार्ता-

पत्रकार: सोनिया गांधी जी की एक जो बहुप्रतीक्षित बुक है, जो इंडिया में आने वाली थी, उसके प्रकाशन पर जो कंपनी है, उसने इंडिया में उसका प्रकाशन करने से इनकार कर दिया। किस तरह देखते हैं इस पूरे विवाद को?

जवाब: देखिए, पेंग्विन इंडिया ने जिस प्रकार से अचानक ही एक ऑथर सोनिया जी, जिसका जैसे ही अनाउंसमेंट हुआ कि 10 नवंबर को वो प्रकाशित होगी पुस्तक। पूरे देश के अंदर एक इंतज़ार होने लग गया कब पुस्तक आएगी। अचानक यह खबर आई जिससे बहुत सबको धक्का लगा कि पेंग्विन इंडिया का जो पैरेंट कंपनी है वर्ल्डवाइड, वो तैयार है छापने के लिए पुस्तक को। तो क्या कारण है कि इंडिया का जो उनका ऑफिस है, वो इंडिया में छापने के लिए तैयार नहीं है?

कोई न कोई दबाव है। पीएमओ का होगा और किसी का होगा, वो तो वक्त बताएगा। पर अचानक यह खबर आ गई कि सोनिया जी जो लेखक हैं, उनसे पूछा गया कि हम कुछ अंश हटाना चाहते हैं। वो कैसे स्वीकार करतीं? मना कर दिया उन्होंने। मुख्य बात यह है। अब जो है क्योंकि चाइना के ऊपर, मोदी जी के ऊपर, आरएसएस पे कुछ कॉमेंट होंगे उसके अंदर इसलिए इनको तकलीफ हुई होगी। तो कहां डेमोक्रेसी रही फिर?

आप फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन को आप बैन करना चाहते हो। यह कहां लिखा हुआ है संविधान के अंदर? संविधान की मूल भावना के खिलाफ आप बात कर रहे हो। और राहुल गांधी जी यही बात कहते हैं बार-बार। संविधान बचाओ का मतलब क्या है? आपने कैसे इस जो पुस्तक आने वाली थी, सोनिया जी ने खुद ने जो लिखवाई थी, उसको आप दबाव देके उसके अंश को हटाना चाहते हो? और पूरी दुनिया में छपेगी वो, इंडिया में नहीं छपेगी बस। बता दीजिए आप, बहुत ही गलत तरीके से यह एक्ट हुआ है। वो बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है।

पत्रकार: आपको लगता है कि एक कंपनी ने यदि मना कर दिया, इंकार कर दिया, तो और कई कंपनियां आगे आएंगी?

जवाब: और कंपनियां ऑफर कर चुकी हैं एक के बाद एक। जैसे ही मालूम पड़ा, तो बड़ी-बड़ी जो प्रतिष्ठित कंपनियां हैं, वो आगे आके सोनिया जी को ऑफर कर रही हैं। यह स्थिति है।

पत्रकार: तो आपको लगता है कि अब चूंकि जो दूसरी कंपनियां ऑफर कर रही हैं, उनके माध्यम से इंडिया में इसका प्रकाशन होना चाहिए?

जवाब: वो फैसला सोनिया जी के स्तर पर होगा। वो तो लेखक सोनिया जी हैं, उनके स्तर पर फैसला होना है। पर जो भी होगा, मैं समझता हूं कि लोगों में आज आक्रोश पैदा हुआ है कि सोनिया गांधी का व्यक्तित्व जो है, अलग अमिट छाप छोड़ चुका है मुल्क के अंदर। जिस रूप में उन्होंने जिंदगी को जिया है देश के अंदर, भारतीय नारी की जो संस्कार-संस्कृति है, उसको जिस रूप में अपनाया विदेशी होते हुए भी, और जिस रूप में उन्होंने व्यतीत किया है जिंदगी को अपनी, जिम्मेवारी निभाई है जो मजबूरी में लेनी पड़ी इनको कांग्रेस प्रेसिडेंट के रूप में, उसको निभाया। बहुत कामयाबी के साथ निभाया।
पूरा देश लोहा मान गया। आज चाहे पक्ष हो, विपक्ष हो, आप किसी से बात करो, प्राइवेटली बात करोगे तो सोनिया गांधी के व्यक्तित्व को लेके इक्के-दुक्के कोई पागल लोग होंगे उनको छोड़ दीजिए, बाकी आपको उनका जो औरा, उनका व्यक्तित्व, उनके कृतित्व को लोग तारीफ करते हैं।

पत्रकार: सर, आरएसएस के जो साप्ताहिक मुखपत्र है 'ऑर्गेनाइजर', उसने हाल ही में एक जो लेख छापा था उसमें जो यूपीए सरकार के समय जो सोनिया गांधी जी की अध्यक्षता में नेशनल एडवाइजरी कमेटी थी, उसको दिमागी नक्सल बताया है। उसको किस तरह देखते हैं आप?

जवाब: देखिए, वो मुझे लगता है वो खुद ही नक्सली सोच वाले लोग होंगे। आज़ादी मिलते ही इन्होंने संविधान का विरोध किया था। संविधान का विरोध करने वाले लोग हैं ये। और मनुस्मृति की बात करने लग गए थे उस ज़माने के अंदर। आज़ादी मिलते ही वही 'ऑर्गेनाइजर' अख़बार है जिसकी कोई क्रेडिबिलिटी नहीं है

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