मीडियाकर्मियों से बातचीत।
दिनांक
26/06/2026 |
स्थान
जयपुर
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पत्रकार का सवाल: श्री राहुल गांधी जी के नेता प्रतिपक्ष के रूप में आज दो साल पूरे हुए हैं। इस दौरान उन्होंने करीब 24 राज्यों का दौरा किया है, कई जनसभाएं की हैं और पार्टी कार्यक्रमों में हिस्सा लिया है। आप इन दो वर्षों के कार्यकाल को कैसे देखते हैं?
मेरा जवाब: इन दो सालों में राहुल गांधी जी ने देश की राजनीति पर अपनी एक अमिट छाप छोड़ी है। जिस प्रकार उन्होंने सदन में अपनी शुरुआत की थी, तब आप सबने देखा होगा कि इतिहास में पहली बार खुद प्रधानमंत्री जी, गृह मंत्री जी और चार-पांच वरिष्ठ मंत्रियों को उनकी स्पीच के बीच में खड़े होकर अपनी बात कहनी पड़ी थी। वे लगातार किसानों, मजदूरों, गरीबों के हक और देश के समग्र विकास की बात कर रहे हैं। सरकार की जो भी नीतियां और कमियां होती हैं, उन्हें वे लगातार पुरजोर तरीके से उठाते रहते हैं।
राहुल जी देश की आवाज को सदन के अंदर भी और सदन के बाहर भी मजबूती से बुलंद कर रहे हैं। संसद के बाहर भी आप देखते हैं कि 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन के लोग जनता के मुद्दों पर लगातार धरने और प्रदर्शन करते हैं। विपक्ष का असली दायित्व ही यही होता है कि देश और प्रदेश की आम जनता क्या सोच रही है, उनकी क्या भावनाएं हैं, विपक्ष सत्ता पक्ष के सामने उसका प्रतिनिधित्व (Represent) करे। राहुल गांधी जी इस जिम्मेदारी को निभाने में बेहद कामयाब रहे हैं। अभी हाल ही में नीट (NEET) परीक्षा के मुद्दे को लेकर भी उन्होंने पूरे देश में एक बड़ा आंदोलन खड़ा किया है। इसलिए राहुल गांधी जी की परफॉर्मेंस को लेकर मैं यही कहना चाहूंगा कि उनका यह दो साल का कार्यकाल बेहद शानदार और ऐतिहासिक रहा है।
पत्रकार का सवाल: प्रधानमंत्री जी एक बार फिर राजस्थान के दौरे पर आ रहे हैं, इस पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है?
मेरा जवाब: मैंने आज ही अखबारों में पढ़ा कि वे इस बार बाड़मेर रिफाइनरी के भीतर ही बैठक करेंगे और पहले की तरह कोई बड़ी आम सभा नहीं करेंगे। मेरा मानना है कि उन्हें बाकायदा एक बड़ी आम सभा करनी चाहिए, क्योंकि यह राजस्थान के विकास से जुड़ा एक बहुत बड़ा काम हुआ है। जब वहां तेल निकल गया था, तब हमने केंद्र सरकार से बहुत अनुनय-विनय की और सालों तक लगातार प्रयास किए। आदरणीय डॉ. मनमोहन सिंह जी और श्रीमती सोनिया गांधी जी ने एचपीसीएल (HPCL) से बात करके राजस्थान सरकार के साथ मिलकर इस रिफाइनरी कंपनी का गठन करवाया था। एचपीसीएल और राजस्थान सरकार की सहभागिता से बनी यह एक साझा कंपनी है।
अब यह प्रधानमंत्री जी के ऊपर है कि वे इसका उद्घाटन किस प्रकार करते हैं। लेकिन मैं आज फिर एक सवाल बार-बार पूछता हूं कि आखिर भाजपा ने अपने पिछले कार्यकाल के दौरान इस रिफाइनरी के काम को पांच साल तक क्यों रोके रखा? इसका जवाब खुद प्रधानमंत्री जी और एनडीए सरकार को देना चाहिए। उन पांच सालों में काम रोकने की वजह से जो आर्थिक बर्बादी हुई, जिसके कारण यह ₹37,000 करोड़ का रिफाइनरी प्रोजेक्ट आज बढ़कर ₹80,000 करोड़ से अधिक का हो गया है, इसका जवाब जनता को आज तक नहीं मिला है।
पत्रकार का सवाल: डॉ. किरोड़ी लाल मीणा द्वारा लगातार जो आरोप लगाए जा रहे हैं, उस पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है?
मेरा जवाब: देखिए, इस विषय पर मैं पहले भी अपने 'एक्स' (पहले ट्विटर) हैंडल के माध्यम से स्पष्ट कह चुका हूं। किरोड़ी लाल मीणा जी उस पार्टी के एक बहुत सीनियर नेता हैं और आरएसएस (RSS) कैडर से भी आते हैं। उन्होंने कई बार अपनी पार्टी छोड़ी और वापस जॉइन की, वह उनका व्यक्तिगत निर्णय है; लेकिन वे सरकार बनने के पहले से ही हर किसी पर बेबुनियाद आरोप लगाते आ रहे हैं। जब मैंने उनसे कहा कि यदि आपके पास कोई प्रमाण हैं तो तथ्य प्रस्तुत कीजिए, तो उनका तर्क बड़ा ही बेतुका और अजीब आया कि 'तथ्यों की जरूरत ही क्या है?' अब भला आप खुद सोचिए, यदि आप किसी पर कोई आरोप लगाते हैं, तो आपको बताना पड़ेगा कि यह आरोप किस आधार पर है और इसके पीछे क्या फैक्ट्स एंड फिगर्स (तथ्य और आंकड़े) हैं। वे कोई तथ्य नहीं बताएंगे।
गोविंद सिंह डोटासरा जी हमारी पार्टी के सम्मानित प्रदेश अध्यक्ष हैं, राज्य के मंत्री रहे हैं। उन्हें इस प्रकार बिना किसी आधार के घेरना अपने आप में एक सोची-समझी राजनीतिक साजिश है। डोटासरा जी के बहाने पूरी कांग्रेस पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाने का यह भाजपा का एक सुनियोजित षड्यंत्र है, और ऐसा लगता है कि इनके दिल्ली बैठे हाईकमान से लेकर नीचे तक के सभी नेताओं ने मिलकर यह तय कर रखा है। इन्हें समझना होगा कि पूरे उत्तर भारत के अंदर कांग्रेस का सबसे मजबूत और सक्रिय संगठन आज राजस्थान में है। आज भी राजस्थान के गांव-गांव और गली-गली में लोग कांग्रेस को याद करते हैं और हमारी जनकल्याणकारी योजनाओं की सराहना करते हैं।
बाकी, लोग इस वर्तमान सरकार के बारे में क्या टिप्पणियां कर रहे हैं, यह मैं आप मीडिया के साथियों पर ही छोड़ता हूं। मैंने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में आज तक ऐसा कभी नहीं देखा, जहां इतने कम समय के भीतर ही सरकार के कुप्रबंधन, ठप पड़े विकास कार्यों और बढ़ते भ्रष्टाचार को लेकर आम जनता का गुस्सा इस कदर फूट पड़ा हो। अस्पताल की बिल्डिंगें खड़ी हैं, लेकिन न वहां डॉक्टर हैं और न ही जरूरी उपकरण। ऐसा कुशासन राजस्थान में पहले कभी नहीं देखा गया, जो आज धरातल पर चल रहा है।
पत्रकार का सवाल: सर, कल दिल्ली में 10 जनपथ पर जो आपकी मुलाकात हुई थी, क्या वह राजस्थान कांग्रेस के संगठन से जुड़े मुद्दों को लेकर थी? उस यात्रा के क्या मायने हैं?
मेरा जवाब: 10 जनपथ की उस बैठक के भीतर मीडिया के साथियों को कोई बहुत बड़ा राजनीतिक गुणा-भाग या नया राजनीतिक परिदृश्य ढूंढने की आवश्यकता नहीं है। दरअसल, 'राजीव गांधी नेशनल रिलीफ एंड वेलफेयर सोसाइटी' का जो ट्रस्ट बना हुआ है, कल उसकी एक नियमित बैठक थी जिसमें सभी ट्रस्टियों को आमंत्रित किया गया था। यह पूरी तरह से एक गैर-राजनीतिक और संस्थागत बैठक थी, इसलिए इसे किसी राजनीतिक कयासबाजी से जोड़कर देखने की कोई जरूरत नहीं है।
पत्रकार का सवाल: सर, गोविंद सिंह डोटासरा जी पर डॉ. किरोड़ी लाल मीणा द्वारा दिए गए बयान पर आपका क्या कहना है?
मेरा जवाब: गोविंद सिंह डोटासरा जी पर जो कुछ भी आरोप लगाए जा रहे हैं, वे पूरी तरह राजनीति से प्रेरित हैं। डोटासरा जी के माध्यम से जानबूझकर कांग्रेस पार्टी को बदनाम करने का यह एक षड्यंत्र है। किरोड़ी मीणा जी जब सरकार में नहीं थे, तब से हम सब पर लगातार आरोप लगा रहे हैं। उस वक्त हम सत्ता में थे और अब इस नई सरकार को आए हुए भी काफी समय हो गया है। यानी पिछले करीब पांच-छह सालों से वे सिर्फ आरोप ही लगा रहे हैं, लेकिन आज तक वे अपने किसी भी आरोप को साबित नहीं कर पाए हैं। उनके आरोपों में न कोई तथ्य (Facts) होते हैं और न ही कोई आंकड़े (Figures); वे केवल हवा में बातें करते हैं, ऐसा मेरा स्पष्ट मानना है। इस प्रकार से आपस में वैमनस्य और राजनीतिक माहौल को खराब करना बिल्कुल भी ठीक नहीं है। इस पर सत्ता पक्ष को गंभीरता से सोचना चाहिए।
लोकतंत्र में विपक्ष की अपनी एक महत्वपूर्ण भूमिका होती है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी आम जनता के मूड, उनकी शिकायतों और उनकी समस्याओं को सरकार के सामने रिप्रेजेंट करती है। हम सब विपक्ष में हैं, इसलिए जनता की भावनाओं को प्रखरता से उठाकर सरकार को समय-समय पर आगाह करते हैं, उनकी नीतियों की आलोचना करते हैं। सरकार को हमारी इस आलोचना को व्यक्तिगत रूप से लेने की बजाय यह देखना चाहिए कि इसमें क्या सच्चाई है। अगर हमारी उठाई गई बातों में सच्चाई है, तो सरकार को उस पर तुरंत सुधारात्मक कार्रवाई करनी चाहिए ताकि जनता को राहत मिल सके।
पत्रकार का सवाल: सर, अभी हाल ही में आपकी दिल्ली यात्रा के दौरान सोनिया गांधी जी और अन्य बड़े नेताओं से चर्चा हुई है, इस पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है?
मेरा जवाब: इस बारे में मैंने अभी थोड़ी देर पहले भी स्पष्ट किया है कि इसमें किसी भी प्रकार का राजनीतिक गुणा-भाग या कयास लगाने की कोई आवश्यकता नहीं है। दरअसल, 'राजीव गांधी नेशनल रिलीफ एंड वेलफेयर ट्रस्ट' बना हुआ है, हम सब उसमें ट्रस्टी हैं और कल उसी ट्रस्ट की एक नियमित बैठक थी। इसलिए इस मुलाकात को लेकर किसी भी तरह का राजनीतिक हिसाब-किताब लगाने का कोई औचित्य नहीं है।
पत्रकार का सवाल: सर, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ साहब कह रहे हैं कि गहलोत साहब खुद अभी कांग्रेस अध्यक्ष बनने की कतार में खड़े हैं?
मेरा जवाब: अब आप ही बताइए, भला उन्हें यह सब बातें कौन समझा देता है? उन्हें दूसरों पर टिप्पणी करने की बजाय अपनी खुद की सरकार की परफॉर्मेंस और कामकाज के बारे में बात करनी चाहिए। मदन राठौड़ साहब पिछले एक लंबे अरसे से जो बयानबाज़ी कर रहे हैं, उससे साफ़ है कि उनका एकमात्र काम कांग्रेस नेताओं को आपस में लड़ाने की बातें करना रह गया है। उन्हें यह समझना चाहिए कि सत्ता पक्ष की मुख्य ज़िम्मेदारी यह होती है कि वे अपनी सरकार की उपलब्धियों और विकास कार्यों को अपनी पार्टी के माध्यम से जनता के सामने रखें।
लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि इस सरकार के पास बताने के लिए कोई उपलब्धि है ही नहीं। यही कारण है कि न तो सरकार के मंत्री धरातल पर कुछ बोल पा रहे हैं और न ही भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अपनी सरकार का पक्ष रख पा रहे हैं। वे केवल कांग्रेस को लेकर उल-जुलूल बातें करते रहते हैं। उनसे पूछा जाना चाहिए कि भाई, आपकी खुद की सरकार है, आप इसकी उपलब्धियों के बारे में जनता को कब बताएँगे? राजस्थान के इतिहास में आज तक ऐसी निष्क्रिय सरकार नहीं देखी गई। पूरे प्रदेश की जनता में इस वक्त सरकार के प्रति बहुत भारी आक्रोश और तीखी प्रतिक्रिया है।
पत्रकार का सवाल: सर, जयपुर के प्रताप नगर में मुख्यमंत्री के काफिले के दौरान एक महिला पर गर्म पानी गिर जाने की दुखद घटना सामने आई है, इस पर आपकी क्या राय है?
जवाब: वह बेहद हृदयविदारक और गंभीर घटना है। देखिए, मुख्यमंत्री जी ने सत्ता संभालने के समय कहा था कि 'मैं लाल बत्ती (Red Light) पर रुकूँगा और मेरे कारण कोई ट्रैफिक डिस्टर्ब नहीं होगा।' अब कोई उनसे पूछे कि उस वादे का क्या हुआ? वैसे सुरक्षा कारणों से मैं भी नहीं कहता कि उन्हें लाल बत्ती पर रुकना चाहिए, क्योंकि सुरक्षा सर्वोपरि है और वीवीआईपी मूवमेंट में कोई भी अप्रिय स्थिति बन सकती है। इसलिए लाल बत्ती होने पर भी काफिले को रोकने की आवश्यकता नहीं होती, और मैंने उनके उस अव्यावहारिक बयान को उसी समय खारिज कर दिया था।
खैर, वे क्यों नहीं रुक रहे हैं, इस पर उन्होंने कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया, वह एक अलग बात है। लेकिन उनके इस वीवीआईपी मूवमेंट के चक्कर में पुलिस प्रशासन ने सड़कों पर हड़बड़ी और खौफ का ऐसा माहौल बना रखा है कि पुलिसकर्मी घबरा जाते हैं कि मुख्यमंत्री जी निकल रहे हैं, पता नहीं क्या हो जाएगा। इसी आपाधापी और पुलिसिया धक्का-मुक्की के चक्कर में वहां सड़क किनारे ठेला लगाने वाले एक गरीब परिवार के ठेले को धक्का लगा, जिससे खौलता हुआ गर्म पानी पास खड़ी महिला पर उछल गया और वे बुरी तरह झुलस गईं। आप अंदाज़ा लगाइए, वह गरीब परिवार उत्तर प्रदेश से यहाँ रोज़ी-रोटी कमाने आया हुआ है, आज उस पूरे परिवार पर क्या बीत रही होगी?
और सबसे बड़ा दुर्भाग्य देखिए, अगर मुख्यमंत्री के काफिले की गाड़ी से किसी को मामूली खरोंच भी आ जाए, तो लोकतांत्रिक सरकारों में उसे बेहद गंभीरता से लिया जाता है और तुरंत सुध ली जाती है। लेकिन यहाँ उस गरीब महिला का शरीर इतनी बुरी तरह जल गया, फिर भी सरकार या प्रशासन के किसी व्यक्ति ने उनकी सुध तक नहीं ली। घायल महिला का उचित इलाज कराने का जो एक न्यूनतम मानवीय कमिटमेंट होता है, वह भी नहीं दिखाया गया और न ही पीड़ित परिवार की कोई आर्थिक मदद की गई। मैं समझता हूँ कि इतनी संवेदनहीन और आमजन के दर्द से बेफ़िक्र सरकार राजस्थान में पहली बार आई है।