जयपुर एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत में अंतर्राष्ट्रीय स्थिति को लेकर अपने विचार साझा किए :
दिनांक
26/03/2026 |
स्थान
जयपुर
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मीडिया द्वारा हमारे द्वारा चलाए जा रहे कैंपेन ‘इंतजारशास्त्र’ और इसमें शामिल आईपीडी टॉवर इत्यादि प्रोजेक्ट्स को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में :
हाँ, ये हम इसलिए चला रहे हैं, सरकार पर दबाव बनाने के लिए। हमारा मकसद यही है कि जो बिल्डिंगें राजस्थान के अंदर खड़ी हो गई हैं, जिन पर अरबों रुपये लग गए हैं जैसे आपका वो कोचिंग हब है जयपुर के अंदर ट्रैफिक जाम रहता है। अब अगर सब कोचिंग वाले हब में चले जाएँ, जहाँ सबके लिए अच्छा इंतज़ाम किया हुआ है, उनसे एडवांस पैसा भी ले लिया गया है, मैं समझता हूँ कोई मिलीभगत हुई होगी पता नहीं क्या हुआ है, आप शिफ्ट नहीं कर रहे उनको। और कोचिंग सेंटर जहाँ बने हुए हैं पूरा ट्रैफिक जाम रहता है।
तो ये जो हमने अभियान चलाया है, ये सरकार पर दबाव देने के लिए चलाया है। आप देख रहे हैं, जो सोशल साइंस इंस्टिट्यूट हम टाटा की तरह खड़ा कर रहे थे, वो बंद पड़ा है। और तो और गांधी म्यूजियम जहाँ आज बच्चों को पूरे प्रदेश से आकर देखना चाहिए ,कोई प्रोग्राम ही नहीं है। तो एक के बाद एक जो ये पेंडिंग पड़े हैं, आईपीडी टावर है, वो सब देख रहे हैं, पूरा प्रदेश देख रहा है।
तो सरकार पर दबाव बना रहे हैं। आज मैंने सुना कि मेडिकल को लेकर इन्होंने कहा कि कोई भी राज्य से 25 लाख तक का इलाज करवा सकता है। तो ये तो हमारे वक्त में ही था, हमारे वक्त में ही था कहीं जाओ, चेन्नई जाओ या बैंगलोर जाओ, आप जाओ, वहाँ अपना इलाज करवा सकते हो। इसमें कोई नई बात नहीं है।
फिर भी इन्होंने अगर ये प्रयास किया है, बताया है कि 25 लाख का बीमा है पहली बार ये लोग बोले हैं। सरकार आने के बाद कंफ्यूजन हो गया था कि 25 लाख का है या नहीं है। उसका फायदा प्राइवेट हॉस्पिटल्स ने उठाया, जनता जाती रही और वो कहते रहे कि कुछ नहीं है, आप पैसा जमा करवाओ। कितना नुकसान हुआ पब्लिक को।
अब जाकर कुछ स्टेटमेंट आया है। ये भी हमारे दबाव के कारण आया है। हमने जो पिछले तीन महीने में दबाव दिया, तब जाकर ये आया है। तो ये स्थिति बनी हुई है। इसलिए हमारा ये अभियान चल रहा है।
राजस्थान में बिगड़ती कानून व्यवस्था की स्थिति पर :
कानून-व्यवस्था की स्थिति पूरी तरह चौपट हो चुकी है। हाल ही में नदबई में भी एक हत्या हुई है। मेरे पास तो सूची है, आख़िर ये लोग और कितनी हत्याएँ करवाएँगे? समझ में ही नहीं आता कि सरकार आखिर समझ क्यों नहीं पा रही है।
देखिए, 21 मार्च को फलौदी में तीन नकाबपोश आए, गोली चलाकर एक व्यक्ति की हत्या कर दी और फरार हो गए।
14 मार्च 2026 को जयपुर में एक प्रॉपर्टी डीलर, कमल मीणा, की गाड़ी पर अंधाधुंध फायरिंग की गई।
भरतपुर में एक ज्वैलर की हत्या कर दी गई , यह मुख्यमंत्री जी का स्वयं का जिला है।
चूरू में 2–3 मार्च 2026 को एक होटल के अंदर फायरिंग हुई और 35 वर्षीय होटल मालिक मणीराम मंडा की हत्या कर दी गई।
15 मार्च 2026 को सिरोही के माउंट आबू में 30 वर्षीय अजय कुमार की हत्या हो गई।
बाड़मेर में एक व्यापारी की सरेआम दुकान में घुसकर गोली मारकर हत्या कर दी गई।
यानी एक ही महीने में 5–7 हत्याएँ हो चुकी हैं। ये हत्याएँ डकैती और गुंडागर्दी के रूप में की गईं। राजस्थान में कानून-व्यवस्था नाम की कोई चीज़ नहीं बची है। आज गाँवों में अत्याचार, अन्याय और उत्पीड़न की जो घटनाएँ हो रही हैं, उनकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। कई मामलों की जानकारी बाहर तक पहुँच ही नहीं पाती।
हमने पहले FIR दर्ज कराना अनिवार्य किया था, लेकिन इसे इन्होंने समाप्त कर दिया। ऐसे में सही स्थिति का पता ही नहीं चल पाता। आंकड़ों की जगलरी की जा रही है, ताकि कम से कम मामले सामने आएँ ये इन्होंने पूरा प्लान कर रखा है।
असम चुनाव में पार्टी द्वारा स्टार कैंपेनर बनाए जाने से जुड़े प्रश्न का जवाब :
चुनाव में हमेशा कैंपेन होता है, ये तो इलेक्शन कमीशन का प्रोसेस है। हर पॉलिटिकल पार्टी कैंपेन के लिए बनाती है।
एलपीजी क्राइसिस को लेकर राजस्थान में सर्वदलीय बैठक बुलाए जाने के सवाल पर :
बुलाई तो अच्छा किया, ये बहुत ही अच्छा किया, इसका तो मैं स्वागत ही करूँगा। कम से कम कोविड के अंदर मैंने दो दिन, ढाई दिन तक पूरे पक्ष-विपक्ष से बातचीत की थी, दो सौ एमएलए थे। तो इन्वॉल्वमेंट करना बुरा नहीं है। अगर यहाँ ऐसे हालात बन रहे हैं और उसके लिए ऑल पार्टी मीटिंग बुलाते हैं, तो उसका स्वागत करना चाहिए।
राजसमंद के विधायक के पुत्र से जुड़े मुद्दे पर पूछे प्रश्न का जवाब :
कितने मंत्रियों के परिवार पर आरोप लगते जा रहे हैं, लगते जा रहे हैं। जब से सरकार बनी है, तब से मंत्रियों के बेटों को पता नहीं किस प्रकार प्रोत्साहन दिया जा रहा होगा। मंत्री को चाहिए, मुख्यमंत्री को चाहिए, डिप्टी सीएम सहित सबको चाहिए कि अपने बेटों को दूर रखें। इससे सरकार का भला होगा। बेटों को नजदीक लाओगे तो बेटा बिगड़ जाएगा, उसको दूर रखो। अच्छे संस्कार घर के अंदर दो। अगर आप उसे सरकार के पास रखोगे, तो आपको मालूम नहीं पड़ेगा कि वो आपको कब बदनाम करवा रहा है। बदनामी आपकी होगी, सरकार की होगी, मंत्रियों की होगी, मुख्यमंत्री की होगी। राजस्थान में क्या-क्या चर्चाएँ चलती हैं, ये बातें मुख्यमंत्री तक पहुँचती नहीं हैं। तो मैं उनको सलाह देना चाहूँगा कि बेटों को दूर रखो।
धन्यवाद।